बहुभाषी होने से महाराष्ट्र का गौरव कम नहीं होता, CM फडणवीस का राज ठाकरे पर पलटवार

Maharashtra Politics News: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बहुभाषी बयान पर राज ठाकरे की टिप्पणी के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पलटवार करते हुए आधा-अधूरा सुनने का आरोप लगाया।
Being multilingual does not diminish Maharashtra's pride: CM Fadnavis hits back at Raj Thackeray
देवेंद्र फडणवीस, राज ठाकरे सोर्स- सोशल मीडिया
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Fadnavis Response To Raj Thackeray Post: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे पर 'चुनिंदा बातें सुनने' का आरोप लगाया और कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने केवल राज्य की बहुभाषी संस्कृति का उल्लेख किया था।

फडणवीस की यह टिप्पणी ठाकरे द्वारा शाह के उस बयान पर परोक्ष रूप से निशाना साधे जाने के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि महाराष्ट्र देश की सबसे अधिक बहुभाषी संस्कृतियों वाला राज्य है और यहां मराठी, कोंकणी, गुजराती, सिंधी, हिंदी, कन्नड़ और वारली समेत कई भाषाएं बोली और विकसित हुई हैं।

शाह का सीधे नाम लिए बिना महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख ने 'कौए के श्राप से गाय नहीं मरती' कहावत का इस्तेमाल करते हुए सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट किया। फडणवीस ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ठाकरे को शाह के पूरे संबोधन को सुनना चाहिए था और उसके बाद ही आलोचना करनी चाहिए थी।

उन्होंने कहा कि 'चुनिंदा बातें सुनना, चुनिंदा बातें बोलना और केवल चुनिंदा बातों पर प्रतिक्रिया देना गलत है।' फडणवीस ने स्पष्ट किया कि शाह ने मराठी भाषा की प्रमुखता और उसके ऐतिहासिक गौरव की बात की थी तथा मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा की वकालत की थी। फडणवीस ने कहा कि शाह ने केवल महाराष्ट्र के समावेशी स्वरूप का उल्लेख किया था।

'आलोचकों के पास शाह पर निशाना साधने बहुत कम आधार'

फडणवीस ने कहा कि बहुभाषी होने से क्षेत्रीय गौरव कम नहीं होता और कई भाषाएं बोलने से किसी व्यक्ति की मातृभाषा या मूल पहचान नहीं बदलती। उन्होंने कहा, 'बहुभाषी होने का मतलब यह नहीं है कि आपकी मातृभाषा अलग है।

मैं बहुभाषी हूं, लेकिन मेरी मातृभाषा मराठी है।' देवेंद्र फडणवीस ने कहा, 'मैं मराठी हूं और मराठी ही रहूंगा। मेरी मराठी पहचान कोई नहीं छीन सकता,' फडणवीस ने आरोप लगाया कि शाह द्वारा मराठी की प्रशंसा किए जाने संबंधी टिप्पणियों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया, क्योंकि उन्हें स्वीकार करने पर आलोचकों के पास शाह पर निशाना साधने के लिए बहुत कम आधार रह जाता।

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क्या है मामला

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे की मंगलवार को सोशल मीडिया पर की गई एक रहस्यमयी पोस्ट ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। ठाकरे ने लिखा, "कौवे के श्राप से गाय नहीं मरती। फिलहाल, बस इतना ही..." उन्होंने पोस्ट में किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया, लेकिन तीखी टिप्पणी के बाद राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे हैं कि उनका इशारा किसकी ओर है।

यह पोस्ट ऐसे समय में आई है जब महाराष्ट्र में भाषा और क्षेत्रीय पहचान को लेकर काफी बहस हो रही है। नवी मुंबई में हाल ही में हुए एक बड़े भाषा सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महाराष्ट्र की बहुभाषी प्रकृति पर जोर दिया था। इस वजह से राज ठाकरे की टिप्पणी को मौजूदा भाषाई राजनीतिक विमर्श से जोड़कर देखा जा रहा है।