राज ठाकरे सोर्स- सोशल मीडिया
मुंबई

राज ठाकरे का भाजपा पर तंज, बोले- सत्ता में होने के बावजूद विपक्ष की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाई पार्टी

Maharashtra Political News: मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने भाजपा के 'लोकतंत्र बचाओ' अभियान पर कसा तंज। कहा- सत्ताधारी दल विपक्ष की मानसिकता में है। पीएम मोदी के बयान पर भी उठाये सवाल।

रूपम सिंह

Highlights

  • राज ठाकरे ने भाजपा के 'लोकतंत्र बचाओ' अभियान पर तंज कसा।

  • बोले- सत्ता में रहते हुए भी भाजपा विपक्षी मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाई।

  • ठाकरे ने विधान परिषद चुनाव को लेकर पीएम मोदी की टिप्पणी पर भी निशाना साधा।

Raj Thackeray BJP Criticism: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने भाजपा के 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने सवाल उठाया कि सत्ता में रहने वाली पार्टी को लोकतंत्र बचाने के लिए विरोध-प्रदर्शन और मोर्चे निकालने की जरूरत क्यों पड़ रही है?

राज ठाकरे ने कहा कि भाजपा सत्ता में होने के बावजूद अब तक विपक्षी दल की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाई है। उन्होंने कांग्रेस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा।

भाजपा अब भी विपक्ष की मानसिकता में

मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान राज ठाकरे ने कहा कि भाजपा को अब तक सत्ता में होने की जिम्मेदारी और भूमिका का एहसास नहीं हुआ है।

वहीं, कांग्रेस को भी यह समझने में समय लगा कि विपक्षी दल के रूप में किस तरह काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को सत्ता से बाहर होने के करीब पांच साल बाद विपक्ष की भूमिका समझ में आनी शुरू हुई है।

सत्ता में रहकर लोकतंत्र बचाओ मोर्चा क्यों?'

भाजपा के अभियान पर कटाक्ष करते हुए मनसे प्रमुख ने सवाल किया कि जब पार्टी सत्ता में है, तो उसे लोकतंत्र बचाने के नाम पर मोर्चा निकालने की क्या जरूरत है?

संविधान बचाने की भाजपा की अपील की तुलना करते हुए उन्होंने केएफसी के लोगो में दिखने वाले बुजुर्ग व्यक्ति का उदाहरण दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह कुछ ऐसा है, जैसे केएफसी के लोगो वाला व्यक्ति लोगों से मुर्गियों को बचाने की अपील कर रहा हो।

पीएम मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट पर भी सवाल

राज ठाकरे ने पिछले महीने महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस पर कटाक्ष करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट की भी आलोचना की।

उन्होंने सवाल उठाया कि चुनिंदा निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव परिणामों पर प्रधानमंत्री को टिप्पणी करने की क्या जरूरत थी? उनके मुताबिक, सत्ता में बैठे नेताओं को हर राजनीतिक घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए।

मतपत्र से चुनाव के बाद बदले थे रुझान

दरअसल, विधान परिषद चुनाव में मतपत्रों से मतदान के बावजूद कांग्रेस के शुरुआती खराब प्रदर्शन पर प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया के जरिए पार्टी पर निशाना साधा था। हालांकि, बाद में चुनावी रुझान बदले और कांग्रेस ने नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट जीत ली। गौरतलब है कि ईवीएम के खिलाफ विपक्षी दलों की मांगों में मतपत्र से चुनाव कराना भी प्रमुख मुद्दा रहा है।

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