Priyanka Chaturvedi vs US India Trade Deal (फोटो क्रेडिट-X)  
मुंबई

'क्या हम अमेरिका के उपनिवेश हैं', रूसी तेल पर अमेरिकी वित्त मंत्री का ट्वीट, प्रियंका का मोदी सरकार पर हमला

Priyanka Chaturvedi vs US India Trade Deal: अमेरिकी वित्त मंत्री के ट्वीट के बाद प्रियंका चतुर्वेदी ने मोदी सरकार को घेरा। रूसी तेल के लिए अमेरिकी 'अनुमति' को उन्होंने भारत के हितों का पतन बताया।

अनिल सिंह

Scott Bessent Russian Oil Waiver India: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते (Trade Deal) और रूसी तेल की खरीद को लेकर जारी विवाद अब राजनीतिक रूप ले चुका है। शिवसेना (UBT) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट (Scott Bessent) के एक हालिया ट्वीट को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। चतुर्वेदी ने आरोप लगाया है कि सरकार ने 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) की बातों को केवल इंस्टाग्राम रील्स तक सीमित कर दिया है, जबकि हकीकत में भारत के राष्ट्रीय हितों को एक व्यापार समझौते की आड़ में अमेरिका के पास गिरवी रख दिया गया है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी वित्त मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर घोषणा की कि अमेरिका भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दे रहा है। प्रियंका चतुर्वेदी ने इस ट्वीट के 'लहजे और अंदाज' पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि अमेरिका अब भारत को एक समान भागीदार (Partner) के बजाय अपने 'उपनिवेश' (Colony) की तरह देख रहा है।

अमेरिकी वित्त मंत्री का ट्वीट और '30 दिनों की छूट'

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने अपने ट्वीट में बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप के ऊर्जा एजेंडे के कारण अमेरिकी तेल और गैस उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर है। उन्होंने लिखा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में तेल का प्रवाह बनाए रखने के लिए ट्रेजरी विभाग भारतीय रिफाइनरों को समुद्र में पहले से फंसे हुए रूसी तेल को खरीदने के लिए 30 दिनों की विशेष अनुमति दे रहा है। बेसेंट ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक 'स्टॉप-गैप' उपाय है और उन्हें उम्मीद है कि भारत भविष्य में अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम ईरान द्वारा वैश्विक ऊर्जा को 'बंधक' बनाने के प्रयासों के दबाव को कम करने के लिए उठाया गया है।

प्रियंका चतुर्वेदी का पलटवार: 'रणनीतिक स्वायत्तता का पतन'

प्रियंका चतुर्वेदी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह भारत के लिए एक बड़ा 'पतन' है। उन्होंने सरकार को घेरते हुए सवाल किया कि क्या अब भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भी वाशिंगटन से अनुमति लेनी पड़ेगी? चतुर्वेदी के अनुसार, सरकार ने जिस ट्रेड डील को ऐतिहासिक बताया था, उसकी कड़वी सच्चाई यह है कि भारत ने अपनी निर्णय लेने की स्वतंत्रता खो दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिकी प्रशासन का यह कहना कि वे 'अनुमति' दे रहे हैं, भारत की संप्रभुता और गौरवशाली इतिहास के खिलाफ है। विपक्षी नेताओं का मानना है कि भारत को तेल किससे खरीदना है, यह फैसला दिल्ली में होना चाहिए, न कि वाशिंगटन में।

ट्रेड डील और रूस-ईरान संकट का समीकरण

यह पूरा विवाद पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के बीच आया है। ईरान से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण भारत ने रूसी तेल की ओर रुख किया था, लेकिन अमेरिका के साथ हुए अंतरिम व्यापार समझौते के तहत भारत ने रूसी तेल की खरीद कम करने का संकेत दिया था। डीजीसीए और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की रिपोर्ट बताती है कि भारत अब भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए करीब 40% आयात खाड़ी देशों से करता है। चतुर्वेदी का आरोप है कि सरकार ने अमेरिकी दबाव में आकर सस्ते रूसी तेल का विकल्प छोड़ दिया है, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

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