Mumbai Police Horse Mounted Unit: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में सुरक्षा का एक नया और शाही दौर शुरू होने जा रहा है। लगभग 88 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद, मुंबई पुलिस के बेड़े में एक बार फिर घुड़सवार दस्ता दस्तक देने के लिए तैयार है। भीड़ नियंत्रण से लेकर तटीय और तंग इलाकों में गश्त को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से, सरकार ने 1.27 करोड़ के बजट और 70 घुड़सवारों की नियुक्ति को हरी झंडी दे दी।
इसके लिए पुलिस महकमे के सब-इंस्पेक्टर से लेकर कांस्टेबल तक के 70 खाली पदों को पुनर्गठित कर इस ऐतिहासिक दस्ते का गठन किया जा रहा है, जिससे मुंबई की सड़कों पर सुरक्षा के साथ-साथ पुलिस की एक रोबीली छवि भी देखने को मिलेगी।
आरंभ में इस घुड़सवार बल को मारोल पुलिस कॉलोनी के खुले मैदान में 30 घोड़ों, एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर, एक सहायक सब इंस्पेक्टर, चार हेड कांस्टेबल और 32 कांस्टेबल की सहायता से सक्रिय किया गया था।
वर्तमान में इस बल में 22 घोड़े हैं। वर्ष के दौरान इसमें और घोड़े जोड़े जाएंगे। इस बल के लिए घुड़सवारी का होना आवश्यक है।
चूंकि सभी पुलिस अधिकारी घुड़सवारी नहीं कर सकते, इसलिए पुलिस ने महसूस किया कि इस उद्देश्य के लिए अलग से घुड़सवारों की आवश्यकता है। पुलिस वाहन भीड़भाड़ वाली जगहों पर आसानी से नहीं जा सकते। मोटरसाइकिल पर गश्त करने में भी कुछ सीमाएं हैं।
हालांकि, घोड़े पर सवार पुलिसकर्मी ऊंचाई और दूरी से बेहतर निगरानी रख सकता है। मुंबई में ऐसी कई भीड़भाड़ वाली जगहें हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह बल वहां उपयोगी साबित होगा।
मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती घुड़सवार बल को सक्रिय करने के लिए उत्सुक हैं। इस घुड़सवार बल को 2020 में पुलिस बल में फिर से शामिल किया गया था। यह बल स्वतंत्रता-पूर्व काल में सक्रिय था, बढ़ते यातायात के कारण 1932 में इसे बंद कर दिया गया था।
इस बल को सक्रिय करते समय मारोल में ढाई एकड़ भूमि पर अस्तबल, घोड़ों के लिए स्विमिंग पूल और प्रशिक्षण केंद्र बनाने की योजना थी। इनमें से अत्याधुनिक अस्तबल का निर्माण 2023 में पूरा हुआ।
पशु चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई है। हालांकि, घुड़सवारों की कमी के कारण यह बल पूरी तरह सक्रिय नहीं हो सका।
गणतंत्र दिवस और महाराष्ट्र दिवस पर होने वाली परेड में इस बल का उपयोग किया जाता है। अब इस घुड़सवार बल को विभिन्न उद्देश्यों के लिए उपयोग करने का विचार भी शुरू हो गया है।
ब्रिटिश काल में सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा रही घुड़सवार यूनिट को वर्ष 1932 में तत्कालीन पुलिस कमिश्नर सर पैट्रिक केली ने भंग कर दिया था।
उस दौर में शहर में मोटर वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण घोड़ों की आवाजाही कठिन हो गई थी और पेट्रोल कारों को प्राथमिकता दी जाने लगी।
आजादी के बाद लगभग 88 वर्षों तक यह पारंपरिक सेवा बंद रही, जिसे 2020 में औपचारिक रूप से फिर से बहाल कर दिया गया।
आधुनिक दौर में यह री-इंडक्ट की गई स्पेशल यूनिट अब मुंबई शहर की व्यस्त सड़कों, समुद्र तटों पर गश्त करने और भीड़ नियंत्रण व कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रही है।