

Western DFC JNPT New Umbargaon Rail Line: महाराष्ट्र के जेएनपीटी से न्यू उंबरगांव के बीच डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का महत्वपूर्ण हिस्सा शुरू होने से पश्चिमी भारत को उत्तर भारत से जोड़ने वाली माल ढुलाई व्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी।
करीब 10 हजार करोड़ रुपए के निवेश से तैयार 178 किलोमीटर लंबे इस रेल मार्ग के जरिए जेएनपीटी से कंटेनरों और मालगाड़ी की आवाजाही तेज होगी। यह कॉरिडोर गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से होते हुए करीब 1500 किलोमीटर लंबे वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का हिस्सा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू हुई इस परियोजना को देश की लॉजिस्टिक्स लागत घटाने और भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का मजबूत केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इसी के साथ ही सड़क का बोझ भी घटेगा। इस तरह का वक्तव्य मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जेएनपीटी में आयोजित डेडिकेटेड फ्रेड कॉरिडोर के कार्यक्रम में दिया।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि जेएनपीटी-न्यू उंबरगांव रेलखंड का निर्माण इंजीनियरिंग के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। पालघर, वसई, वैतरणा और उल्हास नदी क्षेत्र के दलदली 'मरीन क्ले' इलाके के साथ पहाड़ी हिस्सों में चार टनल का निर्माण किया गया है।
डबल-स्टैक कंटेनरों की ऊंचाई को ध्यान में रखकर मार्ग तैयार किया गया है, जो देश में इस तरह की कंटेनर आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
अलग माल रेल मार्ग मिलने से मौजूदा नेटवर्क पर यात्री ट्रेनों का दबाव घटेगा। गति और समयबद्धता बढ़ने के साथ सड़क की भीड़ और आपूर्ति श्रृंखला की लागत कम होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉजिस्टिक्स लागत 14 से घटकर 10 फीसदी हुई है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के पूरी तरह शुरू होने पर इसे 7 फीसदी से नीचे लाने का लक्ष्य है।
देश के करीब 55 फीसदी कंटेनर यातायात से जुड़े जेएनपीटी में अप्रैल-अगस्त के दौरान 38.27 लाख टीईयू की हैंडलिंग हुई, कॉरिडोर शुरू होने से करीब 15 फीसदी वृद्धि की उम्मीद है। अगस्त में 8.32 लाख टीईयू की हैंडलिंग हुई। जेएनपीटी की कंटेनर हैंडलिंग क्षमता 2029-30 तक 10 लाख टीईयू से अधिक करने का लक्ष्य है। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से इस क्षमता का प्रभावी उपयोग होगा।
करीब 147 लाख घनमीटर अर्थवर्क, सैकड़ों पुल-फ्लाईओवर और 51 लाख मैन आवर्स के परिश्रम से परियोजना को आकार दिया गया। कलंबोली में 110 मीटर लंबे और 1,500 टन वजनी फ्लाईओवर गर्डर को चालू रेल यातायात बाधित किए बिना स्थापित करना बड़ी तकनीकी चुनौती रही।
परियोजना में आधुनिक इंजीनियरिंग, बेहतर प्लानिंग और उच्च तकनीकी क्षमता का इस्तेमाल किया गया है। वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से पश्चिमी बंदरगाह उत्तर भारत से जुड़ेंगे, जेएनपीटी से माल की तेज आवाजाही होगी, सड़क पर दबाव घटेगा और रेल की हिस्सेदारी बढ़ेगी।
वाढवण बंदरगाह जेएनपीटी से करीब तीन गुना बड़ा होगा। दोनों बंदरगाहों के विकास से महाराष्ट्र देश के प्रमुख समुद्री केंद्र के रूप में उभरने की उम्मीद है।
राज्यपाल जिष्णु देव शर्मा ने कहा कि करीब 170 रूट किलोमीटर कॉरिडोर रायगढ़, ठाणे और पालघर से होकर गुजरता है। जमीन की लागत छोड़कर महाराष्ट्र हिस्से में 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक का निवेश हुआ है, उन्होंने कहा कि इसकी मदद से बेहतर कनेक्टिविटी और तेज माल परिवहन से महाराष्ट्र समेत देश की आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
जेएनपीटी से देशभर की माल ढुलाई को नई रफ्तार मिलेगी। 20,700 करोड़ रुपए की लागत से बने पश्चिम समर्पित मालवाहतूक मार्गिका के 326 किमी के तीन चरणों का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकार्पण किया और जेएनपीटी से पहली डबल-स्टैक कंटेनर मालगाड़ी को हरी झंडी दिखाई।