Maharashtra Health Minister Prakash Abitkar on Female Foeticide: महाराष्ट्र में गिरते लिंगानुपात और जन्म से पहले अवैध लिंग जांच के जरिए होने वाली कन्या भ्रूण हत्या पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार अब आर-पार के मूड में है। लिंग चयन और भ्रूण हत्या में संलिप्त फर्जी डॉक्टरों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए 'प्री-कन्सेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्नीक्स (PCPNDT) एक्ट, 1994 और 2003' में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है।
स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि आगामी महाराष्ट्र विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के दौरान कानून में संशोधन के लिए एक विशेष विधेयक विधानसभा में पेश किया जाएगा।
इस नए संशोधन का मुख्य उद्देश्य लिंग जांच जैसे गंभीर अपराध में शामिल दोषियों पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) जैसी सख्त धाराएं लागू करना और सजा व दोषसिद्धि की प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी व तीव्र बनाना है।
यह घोषणा स्वास्थ्य मंत्रालय में आयोजित राज्य-स्तरीय टास्क फोर्स की पहली उच्चस्तरीय बैठक के दौरान की गई। PCPNDT एक्ट को जमीनी स्तर पर कड़ाई से लागू करने के उद्देश्य से गठित इस टास्क फोर्स की बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने की।
इस दौरान टास्क फोर्स की चेयरपर्सन व विधान परिषद उपसभापति (MLC) डॉ. नीलम गोर्हे, MLC मनीषा कायंदे, MLC उमा खापरे, MLC स्नेहा दुबे-पंडित और स्वास्थ्य सेवा आयुक्त संजय कटकर समेत कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
मंत्री प्रकाश आबिटकर ने कहा कि टास्क फोर्स के कामकाज को जिला स्तर तक बढ़ाना जरूरी है ताकि उन इलाकों से भी शिकायतें मिल सकें। इसके लिए एक समय-सीमा वाला एक्शन प्लान बनाया जाना चाहिए और अधिकारियों व कर्मचारियों की एक समर्पित टीम नियुक्त की जानी चाहिए।
जनता को जानकारी देने के लिए बिना रजिस्ट्रेशन वाले या 'फर्जी' डॉक्टरों की एक लिस्ट तैयार करके प्रकाशित की जानी चाहिए, ताकि नागरिक उन पर नजर रखने में मदद कर सकें। मंत्री आबिटकर ने ऐसे फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।
स्वास्थ्य मंत्री आबिटकर ने बताया कि आजकल बाजार में पोर्टेबल सोनोग्राफी मशीनें उपलब्ध हैं और Google पर उनके विज्ञापन भी आते हैं, इस बारे में एक सर्वे किया जाना चाहिए और ऐसे उत्पादों पर रोक लगाई जानी चाहिए। इसके अलावा, यह भी जांचा जाना चाहिए कि क्या जानवरों के इलाज के लिए बनी सोनोग्राफी मशीनों का इंसानों के लिए गलत इस्तेमाल तो नहीं हो रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री आबिटकर ने निर्देश दिए कि विधानसभा के शीतकालीन सत्र से पहले सभी जिलों में जिला-स्तरीय कमेटियों की समीक्षा के लिए बैठकें की जाएं और कानून के बारे में जन-जागरूकता फैलाने वालों को और सशक्त बनाने व उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए वर्कशॉप आयोजित की जाएं।