

Maharashtra Hospitals Mandatory Fire Safety Audit: राज्य के अस्पतालों में आग जैसी दुर्घटनाओं को रोकने और आपात स्थिति में मरीजों तथा कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों की अग्निसुरक्षा व्यवस्था की हर 6 महीने में जांच की जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने बताया कि इसके लिए अलग मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं और अगले चार दिनों में यह जारी होने की संभावना है। कोल्हापुर में आबिटकर ने कहा कि हाल ही में अमरावती और छत्रपति संभाजीनगर के अस्पतालों में आग लगने की घटनाओं को सरकार ने गंभीरता से लिया है। इसी के मद्देनजर अस्पतालों में अग्निसुरक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी का निर्णय लिया गया है।
अमरावती के एक अस्पताल में आग लगने के बाद राज्यभर के सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद छत्रपति संभाजीनगर स्थित एशियन अस्पताल में भी आग लगने की घटना सामने आई थी।
आबिटकर के मुताबिक अस्पताल के स्वास्थ्य विभाग और कर्मचारियों ने समय रहते स्थिति को संभाल लिया। जिससे बड़ी जनहानि टल गई। इन घटनाओं से स्पष्ट हुआ है कि अस्पतालों में आपात स्थिति से निपटने के लिए हर समय तैयार व्यवस्था होना जरूरी है। सरकारी और निजी अस्पतालों में फायर ऑडिट समेत जरूरी
अस्पतालों में अग्निसुरक्षा व्यवस्था के लिए एक समान नियम लागू करने के उद्देश्य से एसवोपी तैयार की जा रही है। इसके तहत फायर सेफ्टी सिस्टम। आपातकालीन उपाय और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की नियमित जांच की जाएगी।
आबिटकर ने कहा कि केवल एक बार फायर ऑडिट कराकर प्रक्रिया खत्म नहीं होगी। हर छह महीने में अस्पतालों की अग्निसुरक्षा व्यवस्था का दोबारा परीक्षण किया जाएगा।
महाराष्ट्र सरकार का जोर इस बात पर रहेगा कि फायर सेफ्टी की व्यवस्थाएं केवल कागजों पर न रहें। बल्कि वास्तविक रूप से कार्यरत हों। आबिटकर ने शक्तिपीठ महामार्ग को लेकर भी सरकार की भूमिका स्पष्ट की।
उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाते समय स्थानीय नागरिकों और किसानों को विश्वास में लेना जरूरी है। उन्होंने कहा कि शक्तिपीठ महामार्ग के समर्थन या विरोध में राय रखना लोकतंत्र में स्वीकार्य है।