Naresh Mhaske Attacks Uddhav Thackeray: महाराष्ट्र की राजनीति में 'ऑपरेशन टाइगर' के सफल होने और ठाकरे गुट के 6 सांसदों के पाला बदलने के बाद राज्य का सियासी पारा चढ़ गया है। शिंदे सेना के सांसद नरेश म्हस्के ने इस सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए विपक्षी दल और विशेष रूप से उद्धव ठाकरे गुट पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने विपक्षी नेताओं के व्यवहार और उनके द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
प्रेस से बात करते हुए नरेश म्हस्के ने आत्मविश्वास के साथ कहा कि ऑपरेशन टाइगर पूरी तरह सफल रहा है। उन्होंने विरोधियों द्वारा की जा रही आलोचना को नजरअंदाज करते हुए कहा कि आलोचकों का काम केवल आलोचना करना है, लेकिन सक्सेस तो सक्सेस होता है। म्हस्के ने स्पष्ट किया कि 6 सांसदों का एक साथ आना उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व की बड़ी जीत है।
ठाकरे गुट द्वारा सांसदों की 'खरीद-फरोख्त' और 50 करोड़ के आरोपों पर नरेश म्हस्के ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास अब कहने के लिए कुछ बचा ही नहीं है, इसलिए वे इस तरह की अनर्गल बातें कर रहे हैं। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि लोगों को खुद उन सांसदों से पूछना चाहिए कि उनके शिंदे सेना में शामिल होने का असली कारण क्या है। म्हस्के के अनुसार, इन आरोपों का कोई आधार नहीं है और यह केवल हताशा में दिया गया बयान है।
नरेश म्हस्के ने ठाकरे गुट के नेताओं के आचरण पर बड़ा सवाल खड़ा करते हुए कहा कि वे लोग सुबह गाली देते हैं और शाम को उनके पैर पड़ते हैं। इस बयान के जरिए उन्होंने उद्धव गुट की राजनीति में व्याप्त कथित पाखंड पर निशाना साधा। उनका कहना था कि एक तरफ तो ये नेता सार्वजनिक मंचों से अपशब्दों का प्रयोग करते हैं, लेकिन दूसरी तरफ निजी तौर पर वे अलग व्यवहार करते हैं।
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उद्धव ठाकरे द्वारा राज्य भर में किए जाने वाले दौरों पर प्रतिक्रिया देते हुए म्हस्के ने कहा कि अब इन दौरों से कुछ भी हासिल नहीं होने वाला है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस समय उद्धव ठाकरे को बाहर निकलकर घूमना चाहिए था और लोगों के बीच होना चाहिए था, उस समय वे घर पर बैठे रहे। अब समय निकल चुका है और अब दौरे करने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। म्हस्के का यह बयान सीधे तौर पर उद्धव ठाकरे की कार्यशैली और उनकी संगठन पर पकड़ कमजोर होने की ओर इशारा करता है।