Nitin Gadkari Statement On Marathi: केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि जब तक हम भारत से बाहर नहीं जाते, तब तक हमें अपनी भाषा और संस्कृति का महत्व समझ नहीं आता।
इसी प्रकार, जब तक हम अपने राज्य से बाहर नहीं जाते, तब तक हमें संस्कृति की विविधता का महत्व समझ नहीं आता। मराठी भाषा की संस्कृति महान है। मराठी और बंगाली भाषाओं का साहित्य और संस्कृति महान है।
मराठी लोगों की अपनी एक अलग पहचान है। लेकिन मराठी लोग बाहर जाने से कतराते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। हमें यहां आकर अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व करना चाहिए और उनका प्रसार करना चाहिए, मेरे विभाग में भी कोई मराठी व्यक्ति नहीं है।
अब मराठी लोग अमेरिका में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम कर रहे हैं, लेकिन दिल्ली में नहीं। हमारे लोगों की सबसे बड़ी कमी यह है कि उनमें डायरी लिखने की आदत नहीं है। आप लंदन जाएँगे तो वहाँ हर मशहूर व्यक्ति के पास साहित्य, उसकी डायरी होती है। हमने ऐसा इतिहास दर्ज नहीं किया है। नितिन गडकरी ने अपने भाषण में कहा कि जब वे चाबहार बंदरगाह के काम से ईरान गए थे, तब उनकी मुलाकात अयातुल्ला खामेनेई से हुई थी।
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सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बड़ा संकेत दिया है कि भारत अब 100 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेडिंग की तरफ बढ़ना चाहता है। उनका मानना है कि इससे देश ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बन सकता है और विदेशी तेल पर निर्भरता कम होगी। यानी आने वाले समय में आपकी गाड़ी विदेशी तेल नहीं, बल्कि देश में बने फ्यूल पर दौड़ेंगी। भारत अपनी जरूरत का करीब 87 प्रतिशत तेल आयात करता है। इस पर हर साल लगभग 22 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। इसके अलावा फॉसिल फ्यूल से प्रदूषण भी बढ़ता है। इसलिए अच वैकल्पिक ईंधन और बायो-फ्यूल को बढ़ावा देना जरूरी हो गया है। गडकरी ने कहा कि अगले साल 1 अप्रैल से लागू होने वाले सीएएफई ।।। नियमों का इलेक्ट्रिक और फ्लेक्स फ्यूल वाहनों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।