

Maharashtra Government Employees Strike: महाराष्ट्र में सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। विभिन्न मांगों को लेकर कर्मचारी अपने रुख पर अड़े हुए हैं, जिससे कई विभागों के कामकाज पर असर पड़ने लगा है।
बढ़ते दबाव के बीच Maharashtra Government ने अब समाधान की दिशा में कदम बढ़ाया है। राज्य कैबिनेट की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की गई और कर्मचारियों से संवाद स्थापित करने पर सहमति बनी।
सरकार ने यूनियन से बातचीत की जिम्मेदारी राजेश अग्रवाल को सौंपी है। वे कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों से चर्चा कर इस गतिरोध को खत्म करने की कोशिश करेंगे।
यह हड़ताल स्टेट गवर्नमेंट एम्प्लाइज सेंट्रल एसोसिएशन और स्टेट गवर्नमेंट ग्रुप-डी एम्प्लॉइज सेंट्रल फेडरेशन के नेतृत्व में की जा रही है। साथ ही महाराष्ट्र राज्य राजपत्रित अधिकारी महासंघ ने भी इसे समर्थन दिया है।
कर्मचारी संगठनों का दावा है कि इस हड़ताल में करीब 17 लाख कर्मचारी शामिल हैं। इसमें सरकारी, अर्ध-सरकारी, शिक्षक और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी भी शामिल हैं।
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फिलहाल इस हड़ताल का मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी कामकाज प्रभावित हुआ है। यदि हड़ताल लंबी चली, तो स्वास्थ्य सेवाओं समेत अन्य जरूरी सेवाओं पर भी व्यापक असर पड़ सकता है।
एक तरफ महाराष्ट्र सरकार के द्वारा ‘सर्कुलर’ जारी कर काम पर लौटने का दबाव बनाया जा रहा है, तो दूसरी तरफ कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर ‘आर-पार’ के मूड में हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जल्द ही बीच का रास्ता नहीं निकालते, तो यह हड़ताल राज्य की अर्थव्यवस्था और कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
फिलहाल बारामती उपचुनाव और राज्य की अन्य राजनीतिक गतिविधियों के बीच, यह हड़ताल सरकार के लिए गले की हड्डी बन गई है। चेतावनी बेअसर होने के बाद अब प्रशासन के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हैं।