

Nitin Gadkari Statement: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि भारत को आने वाले समय में 100% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य रखना चाहिए। उनका मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण तेल सप्लाई पर खतरा बढ़ रहा है, जिससे देश के लिए ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनना बेहद जरूरी हो गया है।
गडकरी ने बताया कि भारत अपनी कुल तेल जरूरत का करीब 87% हिस्सा आयात करता है। इससे देश पर आर्थिक बोझ भी बढ़ता है और प्रदूषण भी होता है। हर साल भारत लगभग 22 लाख करोड़ रुपये का पेट्रोल-डीजल आयात करता है। ऐसे में अगर वैकल्पिक ईंधन जैसे एथेनॉल और बायोफ्यूल का इस्तेमाल बढ़ेगा, तो न सिर्फ खर्च कम होगा बल्कि पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा।
गडकरी ने बताया कि साल 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने E20 यानी 20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल लॉन्च किया था। अभी भारत में ज्यादातर गाड़ियां थोड़े बदलाव के साथ इस ईंधन पर आसानी से चल सकती हैं और इससे इंजन को कोई नुकसान नहीं होता। उन्होंने कहा कि ब्राजील जैसे देश पहले ही 100% एथेनॉल ब्लेंडिंग तक पहुंच चुके हैं, और भारत को भी उसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
Nitin Gadkari के अनुसार, 1 अप्रैल से लागू होने वाले CAFE III नियमों का असर इलेक्ट्रिक और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों पर कम पड़ेगा। इसका मतलब है कि आने वाले समय में ये वाहन ज्यादा फायदेमंद और लोकप्रिय हो सकते हैं।
ग्रीन हाइड्रोजन को लेकर गडकरी ने कहा कि यह भविष्य का ईंधन है, लेकिन अभी इसकी लागत काफी ज्यादा है। अगर भारत को ऊर्जा निर्यातक बनना है, तो हाइड्रोजन की कीमत को 1 डॉलर प्रति किलो तक लाना होगा। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि कचरे से हाइड्रोजन बनाने पर ध्यान देना चाहिए, जिससे ऊर्जा के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा मिलेगा।
Nitin Gadkari ने माना कि पेट्रोल और डीजल वाहनों के इस्तेमाल को कम करना जरूरी है, लेकिन लोगों को जबरदस्ती इनसे दूर नहीं किया जा सकता। सोशल मीडिया पर E20 को लेकर जो चिंताएं सामने आ रही हैं, उन पर उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम सेक्टर इस बदलाव के खिलाफ लॉबिंग कर रहा है।
गडकरी ने ऑटो कंपनियों से अपील की कि वे लागत कम करने के बजाय गुणवत्ता पर ध्यान दें, ताकि वे नए बाजारों में आसानी से जगह बना सकें।
अगर भारत 100% एथेनॉल ब्लेंडिंग की दिशा में आगे बढ़ता है, तो यह देश के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है जहां पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण को भी राहत मिलेगी।