फेरी राइड (सौ. सोशल मीडिया ) 
मुंबई

Nerul–Mumbai Ferry From Dec 15: सिर्फ 30 मिनट में पहुंचेगी फेरी, किराया ₹935,जानें पूरी डिटेल

Mumbai News: नेरुल–मुंबई फेरी सेवा 15 दिसंबर से शुरू होने जा रही है। 90 मिनट की सड़क यात्रा अब केवल 30 मिनट में पूरी होगी। शुरुआत में 20-सीटर बोट से प्रतिदिन चार ट्रिप चलेंगी।

अपूर्वा नायक

Nerul-Mumbai Ferry News: नवीं मुंबई के रहवासियों के लिए एक अच्छी खबर है। लंबे समय से अटकी नेरुल–मुंबई (भाऊचा धक्का) फेरी सेवा अब 15 दिसंबर से शुरू होने जा रही है। इस सेवा के शुरू होने के साथ ही सिडको द्वारा विकसित नेरुल पैसेंजर वाटर टर्मिनल (NPWT) को आखिरकार पूरी तरह उपयोग में लाने का अवसर मिलेगा।

नई पैसेंजर फेरी सेवा से नेरुल से भाऊचा धक्का तक की यात्रा अब बेहद कम समय में पूरी हो सकेगी। जहां सड़क मार्ग से इस सफर को पूरा करने में लगभग 90 मिनट लगते हैं वहीं फेरी से यह दूरी केवल 30 मिनट में तय हो जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में 20-सीटर बोट के साथ रोजाना चार ट्रिप संचालित होंगी। प्रति यात्री किराया 935 रुपये रखा गया है। सिडको अधिकारियों का कहना है कि संचालन शुरू करने के लिए आवश्यक मंजूरियां तय समय पर मिलने की पूरी उम्मीद है।

वाटर ट्रांसपोर्ट से बचेगा समय

सिडको के एमडी विजय सिंगल ने फेरी सेवा को को क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। सिंगल कहते हैं , ‘एयरपोर्ट, मेट्रो और नई सड़क परियोजनाओं की प्रगति के बीच अब वाटर ट्रांसपोर्ट भी एक बड़ी कड़ी बनने जा रहा है। यह रूट यात्रा समय कम कर क्षेत्रीय गतिशीलता को मजबूत करेगा।’

सुरक्षा और टूरिज्म को लेकर बड़े ऐलान

फेरी ऑपरेटर वाटरफ्रंट एक्सपीरियंस मुंबई प्राइवेट लिमिटेड (दृष्टि ग्रुप) ने बताया कि नेरुल-मुंबई रूट पर सुरक्षा उपाय और मजबूत किए गए हैं। सभी यात्रियों को बोर्डिंग के दौरान लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य होगा।कंपनी ने यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए टूरिज्म एक्टिविटी बढ़ाने की भी घोषणा की है। एक अधिकारी के अनुसार, ‘जनवरी तक स्पीडबोट शो और जेट स्की सहित वॉटर स्पोर्ट्स शुरू किए जाएंगे। इसके साथ फ्लोटिंग रेस्त्रां और फ्लेमिंगो टूरिज्म सर्किट भी योजना में है।

150 करोड़ की लागत, 2023 में हुआ था उदघाटन

करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से बने नेरुल वाटर टर्मिनल का 2023 में उद्घाटन हुआ था, लेकिन मंजूरियां मिलने में देरी और टेंडर को लेकर चल रही लिखापढ़ी की वजह से यह लगभग तीन साल तक निष्क्रिय पड़ा रहा। इस साल शुरू हुई नेरुल-एलिफेंटा सेवा पर भी यात्रियों की संख्या बेहद कम रही, पिछले एक महीने में केवल 60 लोगों ने ही इसका उपयोग किया। ऑपरेटरों का मानना है कि नियमित फ्रीक्वेंसी और जागरूकता से यात्री संख्या धीरे-धीरे बढ़ेगी।

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