NCP Power War Sunetra Pawar: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के निर्वाचन को लेकर शुरू हुआ विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। चुनाव आयोग को लिखे गए डीसीएम सुनेत्रा पवार के पत्रों में प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे के पदों का जिक्र नहीं होने के बाद से राकां में शुरू हुआ विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। अब सामने आए इस विवाद के नए स्वरूप से यह तय लगने लगा है कि दिवंगत डीसीएम अजीत पवार की राकां में फूट अटल है क्योंकि नए विवाद में पार्टी के अंदर से सीधे राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा के निर्वाचन को ही चुनौती दी गई है। इससे यह साफ है कि पार्टी के भीतर सुनेत्रा और उनके बेटे पार्थ के खिलाफ असंतोष गहराता जा रहा है।
शरद गुट में भी बड़ी सियासी उथल-पुथल मची है। दावा किया जा रहा है कि विस के मानसून सत्र के दौरान जयंत पाटिल की अध्यक्षता में एक गुप्त बैठक हुई थी, जिसमें रोहित पवार को छोड़ कर पार्टी के अन्य सभी 9 विधायक मौजूद थे और सभी ने एनडीए में शामिल होने की इच्छा जताई थी। इस बैठक से रोहित को अलग रखा गया, जिससे वे अपनी ही पार्टी में बिल्कुल अकेले पड़ गए हैं।
सुनेत्रा पवार पर हमले के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिरकार सच्चिदानंद सिंह ने उन्हें किसके इशारे पर चुनौती दी है और क्या उन्हें पार्टी के अन्य नेताओं का भी समर्थन प्राप्त है? पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने सच्चिदानंद सिंह के आरोपों को खारिज किया। तटकरे ने सिंह के नोटिस को तथ्यहीन करार देते हुए कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया पार्टी के संविधान, कानून और नियमों से हुई है।
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इसी बीच शरद पवार गुट को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। दावा किया जा रहा है कि विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान हुई एक बैठक में पार्टी के अधिकांश विधायक मौजूद थे, जबकि रोहित पवार इसमें शामिल नहीं थे। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पार्टी की ओर से भी इस संबंध में कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों में जारी घटनाक्रम के बीच महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। आने वाले दिनों में संगठनात्मक फैसलों और नेतृत्व से जुड़े मुद्दों पर पार्टी की रणनीति क्या होगी, इस पर राजनीतिक दलों और कार्यकर्ताओं की नजर बनी हुई है।