छगन भुजबल ने अजित पवार गुट में फैसलों को लेकर नाराजगी जताई।
झीशान सिद्दीकी की नियुक्ति की जानकारी मीडिया से मिलने का दावा किया।
प्रफुल्ल पटेल की तरह भुजबल ने भी संगठनात्मक समीक्षा और सुधार की जरूरत बताई।
Maharashtra Politics News: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के अजित पवार गुट में संगठनात्मक फैसलों और आंतरिक निर्णय प्रक्रिया को लेकर असंतोष सामने आने लगा है। राज्य के मंत्री छगन भुजबल ने पार्टी के कामकाज पर नाराजगी जताते हुए कहा कि महत्वपूर्ण फैसले लेते समय चुनिंदा नेताओं से ही चर्चा की जाती है, जबकि अन्य वरिष्ठ नेताओं को विश्वास में नहीं लिया जाता। उन्होंने पार्टी में संवाद बढ़ाने और संगठनात्मक स्तर पर आत्ममंथन करने की जरूरत बताई है।
छगन भुजबल ने पार्टी के मुंबई अध्यक्ष पद पर जीशान सिद्दीकी की नियुक्ति का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें इस फैसले की जानकारी पार्टी की ओर से नहीं दी गई, बल्कि इसकी खबर उन्हें मीडिया के माध्यम से मिली। भुजबल के मुताबिक, पार्टी में महत्वपूर्ण नियुक्तियों और फैसलों से पहले वरिष्ठ नेताओं के साथ पर्याप्त विचार-विमर्श होना चाहिए।
उनके इस बयान से पार्टी की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया और वरिष्ठ नेताओं की भूमिका को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। जीशान सिद्दीकी को मुंबई इकाई का अध्यक्ष बनाए जाने की घोषणा 28 अक्टूबर को पार्टी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार ने की थी।
विधान परिषद चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव और कामकाज की समीक्षा की मांग तेज हुई है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने चुनावी नतीजों को आत्ममंथन का अवसर बताते हुए संगठन की प्राथमिकताओं और ढांचे की समीक्षा करने की जरूरत जताई थी।
अब छगन भुजबल ने भी पटेल की इस भूमिका का समर्थन किया है। उनका मानना है कि पार्टी को अपनी कार्यप्रणाली पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और वरिष्ठ नेताओं को निर्णय प्रक्रिया में उचित स्थान देना चाहिए।
विधान परिषद चुनाव में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद संगठनात्मक कमजोरियों पर चर्चा हो रही है। प्रफुल्ल पटेल ने भी चुनावी प्रदर्शन के बाद समीक्षा की जरूरत बताई थी। ऐसे में भुजबल का बयान पार्टी के भीतर संवाद, नियुक्तियों और नेतृत्व की निर्णय प्रक्रिया से जुड़े सवालों को फिर सामने लाता है।
पार्टी के सामने अब संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा करने के साथ वरिष्ठ नेताओं के बीच समन्वय बनाए रखने की चुनौती है।