151वीं जयंती पर देखिए सरदार वल्लभभाई पटेल की ऐतिहासिक तस्वीरें और उनसे जुड़ी कहानियां

Sardar Vallabhbhai Patel Rare Photos: सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन की ऐतिहासिक तस्वीरें देखिए। नडियाद के बचपन, लंदन की बैरिस्टरी, बारडोली सत्याग्रह से लेकर रियासतों के एकीकरण और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक।
Sardar Vallabhbhai Patel Jayanti
सरदार वल्लभभाई पटेल जयंतीडिजाइन फोटो
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Sardar Patel 151st birth anniversary
31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में जन्मे वल्लभभाई पटेल एक साधारण किसान परिवार से थे। पिता झवेरभाई और मां लाडबा थीं, और पैतृक गाँव करमसद है। कम उम्र से ही वे अपनी मेहनत और सीधे स्वभाव के लिए जाने जाते थे। उनकी 151वीं जयंती पर देखिए उनके जीवन की 8 ऐतिहासिक झलकियां।सोर्स- सोशल मीडिया
Sardar Vallabhbhai Patel
शुरुआत में उन्होंने वकालत की और पैसे जोड़कर 1910 में इंग्लैंड गए, जहाँ मिडिल टेम्पल से बैरिस्टर की पढ़ाई की। बताया जाता है कि वे अपनी कक्षा में अव्वल रहे। 1913 में भारत लौटकर उन्होंने अहमदाबाद में वकालत शुरू की और जल्द ही शहर के नामी वकीलों में गिने जाने लगे। उनका रहन-सहन उस समय आधुनिक और पाश्चात्य ढंग का था।सोर्स- सोशल मीडिया
Sardar Vallabhbhai Patel’s meeting with Gandhiji and the Kheda Satyagraha
1917 के आसपास गांधीजी से मिलने के बाद पटेल की ज़िंदगी की दिशा बदल गई। उन्होंने वकालत की चमक-दमक छोड़कर सादा जीवन अपनाया और खादी पहनने लगे। 1918 के खेड़ा सत्याग्रह में फ़सल ख़राब होने के बावजूद लगान वसूली के विरुद्ध किसानों के साथ वे डटकर खड़े रहे। यहीं से उनकी जन-नेता की पहचान बनी।सोर्स- सोशल मीडिया
Patel among the farmers at the Bardoli Satyagraha
1928 में गुजरात के बारडोली में बढ़ाए गए भू-राजस्व के विरुद्ध किसानों ने सत्याग्रह किया और पटेल ने उसका नेतृत्व सँभाला। अंततः सरकार को बढ़ा हुआ लगान वापस लेना पड़ा। माना जाता है कि इसी आंदोलन के बाद बारडोली की महिलाओं और किसानों ने उन्हें "सरदार" की उपाधि दी, जो आगे चलकर उनके नाम का हिस्सा बन गई।सोर्स- सोशल मीडिया
The Salt Satyagraha and Days in Jail
1930 में नमक सत्याग्रह के समय दांडी मार्च शुरू होने से पहले ही पटेल को गिरफ़्तार कर लिया गया। 1931 में कराची अधिवेशन में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के बाद उन्हें फिर गिरफ़्तार किया गया और वे अहमदनगर किले की जेल में रहे। जेल जीवन और संघर्ष ने उनके संकल्प को और मज़बूत किया।सोर्स- सोशल मीडिया
Deputy Prime Minister and Home Minister of independent India
15 अगस्त 1947 को आज़ादी के साथ पटेल देश के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री बने। उन्होंने रियासत मंत्रालय भी सँभाला। बँटवारे के बाद के कठिन दौर में शरणार्थियों के पुनर्वास, कानून-व्यवस्था और प्रशासन को स्थिर रखने की बड़ी ज़िम्मेदारी उन पर थी। उन्हें अखिल भारतीय सेवाओं के ढाँचे को मज़बूत करने का श्रेय भी दिया जाता है।सोर्स- सोशल मीडिया
Patel with V.P. Menon
आज़ादी के समय लगभग 560 से ज़्यादा रियासतें थीं (अक्सर 562 का आँकड़ा बताया जाता है)। सचिव वी.पी. मेनन के साथ मिलकर पटेल ने बातचीत, समझाइश और कूटनीति से इन्हें भारत में मिलाया। जूनागढ़ और हैदराबाद जैसे मामले कठिन रहे। जूनागढ़ में जनमत संग्रह हुआ और सितंबर 1948 में पुलिस कार्रवाई के बाद हैदराबाद का विलय हुआ। इसी भूमिका के कारण उन्हें "भारत का लौह पुरुष" कहा जाता है।सोर्स- सोशल मीडिया
A magnificent view of the Statue of Unity
15 दिसंबर 1950 को मुंबई में सरदार पटेल का निधन हुआ। 1991 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया। गुजरात के केवड़िया (एकता नगर) में नर्मदा तट पर बनी 182 मीटर ऊँची "स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी" का उद्घाटन उनकी जयंती पर 31 अक्टूबर 2018 को हुआ। 2014 से हर साल इस दिन "राष्ट्रीय एकता दिवस" मनाया जाता है।डिजाइन फोटो

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