शुरुआत में उन्होंने वकालत की और पैसे जोड़कर 1910 में इंग्लैंड गए, जहाँ मिडिल टेम्पल से बैरिस्टर की पढ़ाई की। बताया जाता है कि वे अपनी कक्षा में अव्वल रहे। 1913 में भारत लौटकर उन्होंने अहमदाबाद में वकालत शुरू की और जल्द ही शहर के नामी वकीलों में गिने जाने लगे। उनका रहन-सहन उस समय आधुनिक और पाश्चात्य ढंग का था।सोर्स- सोशल मीडिया