

Highlights:
सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती को 'राष्ट्रीय एकता दिवस' के रूप में मनाया जा रहा है।
पत्नी झावेरबा के निधन की खबर अदालत में मिली, लेकिन उन्होंने केस की बहस पूरी की।
पत्नी के निधन के बाद वल्लभभाई पटेल ने दोबारा शादी नहीं की। उनके दो बच्चे थे।
The Iron Man Sardar Vallabhbhai Patel: देश के पहले गृह मंत्री और 'लौह पुरुष' के नाम से मशहूर सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती 31 अक्टूबर को 'राष्ट्रीय एकता दिवस' के रूप में मनाई जा रही है। स्वतंत्र भारत के निर्माण में उन्होंने जो भूमिका निभाई, वह आज भी हमारे राष्ट्र की नींव है।
सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में एक किसान परिवार में हुआ था। जवेरभाई और लाडबा के घर जन्मे वल्लभभाई आगे चलकर देश के पहले उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री बनेंगे, ये किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा करमसद के एक स्थानीय स्कूल से प्राप्त की और 1897 में नडियाद हाई स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास की।
परिवार की आर्थिक स्थिति कठिन होने के कारण, उन्होंने महंगी विश्वविद्यालयी शिक्षा लेने के बजाय 'डिस्ट्रिक्ट प्लीडर' (जिला वकील) की परीक्षा पास की, जिससे उन्हें वकालत करने का लाइसेंस मिल गया। अगस्त 1910 में, वे अपने बड़े भाई विट्ठलभाई पटेल की मदद करने और अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए इंग्लैंड चले गए।
उन्होंने लंदन के 'मिडल टेम्पल' में दाखिला लिया, जहां उन्होंने 36 महीने का कोर्स केवल 30 महीने में पूरा किया और प्रथम श्रेणी (फर्स्ट क्लास) के साथ अपनी परीक्षा उत्तीर्ण की। वल्लभभाई पटेल 1913 में भारत लौटे और अहमदाबाद में वकालत शुरू की।
1893 में, वल्लभभाई पटेल ने जवेरबा पटेल से विवाह किया। उनके दो बच्चे थे। एक बेटी, मणिबेन पटेल (जन्म 1904) और एक बेटा, डाह्याभाई पटेल (जन्म 1905)। 1909 में, कैंसर के कारण उनकी पत्नी जवेरबा का निधन हो गया।
उनकी पत्नी के निधन से जुड़ा एक किस्सा सरदार वल्लभभाई पटेल के व्यक्तित्व की एक झलक पेश करता है। 1909 में, झावेरबा पटेल को बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां कुछ समय तक उनका इलाज चला, लेकिन एक ऑपरेशन के दौरान उनका निधन हो गया।
अपनी पत्नी के निधन के समय, वल्लभभाई अदालत की कार्यवाही में व्यस्त थे। वे अदालत में बहस कर रहे थे, तभी किसी ने उनके पास आकर उन्हें एक पर्ची दी। उस पर्ची में उनकी पत्नी के निधन की खबर थी। इसे पढ़ने के बाद, उन्होंने चुपचाप पर्ची को अपनी जेब में रखा और अपनी बहस जारी रखी।
जब वे केस जीत गए और अदालत की कार्यवाही पूरी हो गई, तब उन्होंने सबको अपनी पत्नी के निधन के बारे में बताया। यह सुनकर वहां मौजूद सभी लोग पूरी तरह स्तब्ध रह गए। वल्लभभाई ने अपने पूरे जीवन में फिर कभी शादी नहीं की।