

सिंहस्थ कुंभ से पहले 30 अक्टूबर को निकाली गई महाध्वज की नगर परिक्रमा।
तपोवन स्थित मोदी मैदान से शुरू हुई भव्य शोभायात्रा।
विभिन्न अखाड़ों के महंत, साधु-संत और श्रद्धालु हुए शामिल।
भगवा ध्वजों, ढोल-ताशों और धार्मिक जयघोषों से भक्तिमय हुआ माहौल।
महाध्वजारोहण से पहले नगर परिक्रमा की परंपरा निभाई गई।
Nashik Simhastha Kumbh Mela Flag Procession: नासिक -त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभमेले से पहले शुक्रवार को महाध्वज की भव्य नगर परिक्रमा निकाली गई। तपोवन के मोदी मैदान से शुरू हुई शोभायात्रा में विभिन्न अखाड़ों के साधु-संतों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। 'जय श्रीराम' और 'हर-हर महादेव' के जयघोष से पूरा शहर भक्तिमय हो उठा।
नासिक , आगामी नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभमेले को लेकर धार्मिक उत्साह अब शहर की सड़कों पर भी दिखाई देने लगा है। महाध्वजारोहण से पहले शुक्रवार, 30 अक्टूबर को नासिक में महाध्वज की भव्य नगर परिक्रमा निकाली गई। इस शोभायात्रा में साधु-संतों, विभिन्न अखाड़ों के महंतों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
तपोवन स्थित मोदी मैदान से शुरू हुई इस नगर परिक्रमा के दौरान पूरा शहर 'जय श्रीराम' और 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गूंज उठा। भगवा ध्वजों से सजी शोभायात्रा में श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। जगह-जगह धार्मिक उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिला।
महाध्वज की शोभायात्रा में ढोल-ताशों की गूंज और धार्मिक जयघोषों ने वातावरण को उत्सवमय बना दिया। विभिन्न अखाड़ों के साधु-संतों और महंतों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष धार्मिक स्वरूप दिया। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ नगर परिक्रमा में हिस्सा लेकर आगामी सिंहस्थ कुंभमेले के स्वागत का संदेश दिया।
भगवा ध्वजों से सजी शोभायात्रा के माध्यम से शहर में कुंभपर्व को लेकर उत्साह और धार्मिक वातावरण तैयार करने का प्रयास किया गया।
सिंहस्थ कुंभमेले के मुख्य महाध्वजारोहण से पहले धर्मध्वज की नगर परिक्रमा कराने की पुरानी परंपरा रही है। इस परंपरा का उद्देश्य शहर में धार्मिक वातावरण तैयार करने के साथ ही नागरिकों को कुंभमेले के आयोजन से जोड़ना है।
नगर परिक्रमा के जरिए कुंभपर्व के आगमन का संदेश दिया जाता है। नासिक और त्र्यंबकेश्वर में होने वाले सिंहस्थ कुंभ को लेकर इस आयोजन के साथ ही धार्मिक गतिविधियों का उत्साह और बढ़ गया है।