Amruta Fadnavis Navratri Garba Muslim Entry Controversy: नवरात्रि उत्सव शुरू होने में करीब एक महीने का समय बाकी है, लेकिन महाराष्ट्र में गरबा और दांडिया को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। मंत्री नितेश राणे ने गरबा आयोजनों में मुस्लिमों के प्रवेश का विरोध करते हुए ‘लव जिहाद’ का मुद्दा उठाया था। अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने इस मुद्दे पर अपनी स्पष्ट राय रखी है।
अमृता फडणवीस ने कहा कि त्योहारों का स्वरूप लोगों को जोड़ने वाला होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति गरबा में आता है, सही तरीके से उत्सव में शामिल होता है और आनंद लेकर जाता है, तो उन्हें इसमें कुछ गलत नहीं लगता।
उनका यह बयान नितेश राणे के उस रुख से अलग माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने गरबा आयोजनों में मुस्लिमों के प्रवेश पर आपत्ति जताई थी।
डीजे पर प्रतिबंध और त्योहारों से जुड़े नियमों पर पूछे गए सवाल के जवाब में अमृता फडणवीस ने कहा कि सरकार और अदालत की ओर से जो नियम तय किए गए हैं, उनका पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिस सोसायटी या इलाके में लोग रहते हैं, वहां दूसरे लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
अमृता फडणवीस ने धार्मिक आयोजनों को लेकर कहा कि घर पर धर्म का पालन करना अच्छी बात है, जबकि सार्वजनिक तौर पर मनाए जाने वाले त्योहार नियमों के दायरे में होने चाहिए।
मंत्री नितेश राणे ने गरबा आयोजनों में मुस्लिमों के प्रवेश का विरोध किया था। उन्होंने ‘लव जिहाद’ का हवाला देते हुए कहा था कि मुस्लिमों को गरबा में प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए। उनके बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई।
मनसे नेता अमित ठाकरे ने नितेश राणे के बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले गरबा में प्रवेश के लिए आधार कार्ड अनिवार्य करने की मांग सामने आई थी, जबकि अब गैर-हिंदुओं को ‘घर वापसी’ की सलाह देने और धर्म परिवर्तन की बात कही जा रही है।
अमित ठाकरे ने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान सामाजिक तनाव बढ़ाने और विवाद को भड़काने के उद्देश्य से दिए जा रहे हैं।
महाराष्ट्र में इस साल त्योहारों से जुड़े नियमों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी पहले भी सामने आ चुकी है। दहीहांडी और गणेशोत्सव के दौरान डीजे तथा ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों पर बहस हुई। अब नवरात्रि से पहले गरबा में प्रवेश को लेकर विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।