Navi Mumbai Cyber Fraud: देश में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर मासूम लोगों को अपना शिकार बनाने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है। महाराष्ट्र की नवी मुंबई पुलिस ने गुजरात से एक ऐसे 24 वर्षीय शख्स को गिरफ्तार किया है, जो देश में सिम कार्ड एक्टिवेट कर कंबोडिया में बैठे साइबर ठगों को सप्लाई करता था।
हैरान करने वाली बात यह है कि पकड़ा गया आरोपी उमंग विजयभाई लाकोड पेशे से एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर है। उसने अब तक 1,000 से अधिक सिम कार्ड कंबोडिया तस्करी के जरिए भेजे हैं, ताकि उनका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर अपराधों को अंजाम देने के लिए किया जा सके।
नवी मुंबई पुलिस ने बताया कि इसी साल 23 मार्च से 31 मार्च के बीच पीड़ित को ठगी का निशाना बनाया गया। ठगों ने व्हाट्सऐप और सिग्नल ऐप के जरिए पीड़ित से संपर्क किया और खुद को आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) का अधिकारी बताया। उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नाम और लोगो वाला फर्जी पत्र तथा जाली गिरफ्तारी वारंट भेजकर पुलिस कार्रवाई की धमकी दी।
ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित को 'डिजिटल अरेस्ट' में रखकर डराया। फिर पीड़ित को कानूनी कार्रवाई से बचाने के नाम पर उन्होंने कई बैंक खातों की जानकारी ली और पीड़ित पर कुल 1 करोड़ 54 लाख 98 हजार रुपये ट्रांसफर करने का दबाव डाला।
करोड़ों की ठगी का अहसास होने के बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। नवी मुंबई पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी विश्लेषण शुरू किया। अपराध में इस्तेमाल किए गए व्हाट्सऐप अकाउंट, सिग्नल प्रोफाइल और मोबाइल नंबरों को ट्रैक करते हुए पुलिस की टीम गुजरात पहुंची। आखिरकार, 3 जुलाई को पुलिस ने अहमदाबाद के अमराईवाड़ी निवासी उमंग विजयभाई लाकोड को वडोदरा से धर दबोचा।
नवी मुंबई पुलिस ने आरोपी के पास से अलग-अलग टेलीकॉम कंपनियों के 347 सिम कार्ड के पैकेट, 3 मोबाइल फोन, 2 डेबिट कार्ड, 6 चेकबुक, एक पासबुक और 2 आधार कार्ड बरामद किए हैं। पुलिस के मुताबिक लाकोड ने कथित तौर पर पीड़ित को निशाना बनाने में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और सिम कार्ड सक्रिय किए और उन्हें कंबोडिया भेजा। नवी मुंबई पुलिस की जांच में पता चला है कि वह अब तक 1,000 से अधिक सिम कार्ड सक्रिय कर कंबोडिया भेज चुका है।
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पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे टेलीग्राम, इंस्टाग्राम या व्हाट्सऐप पर शेयर बाजार में ऊंचे मुनाफे का लालच देने वाले अनचाहे संदेशों का जवाब न दें और न ही उनके द्वारा भेजी गई किसी फाइल को डाउनलोड करें। पुलिस ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति इस तरह की साइबर ठगी का शिकार होता है, तो उसे तुरंत निकटतम पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करानी चाहिए या राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन के टोल-फ्री नंबर 1930 पर फोन करना चाहिए।
(एजेंसी इनपुट के साथ)