वडाला स्टेशन गोल्डन जैकाल रेस्क्यू मुंबई सोर्स- सोशल मीडिया
मुंबई

मुंबई के वडाला स्टेशन के पास दिखा गोल्डन जैकाल, आवारा कुत्तों ने घेरा; रेस्क्यू कर बचाई जान

Maharashtra Forest Department: मुंबई के वडाला स्टेशन के पास आवारा कुत्तों के झुंड से घिरा घायल गोल्डन जैकाल सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। प्राथमिक उपचार के बाद वन विभाग को सौंपा गया।

रूपम सिंह

Wadala Station Golden Jackal Rescue Mumbai: मुंबई में मध्य रेलवे के बेहद व्यस्त वडाला रोड रेलवे स्टेशन परिसर के पास एक गोल्डन जैकाल के पहुंचने से हड़कंप मच गया। आवारा कुत्तों के झुंड ने इस जंगली जानवर को घेर लिया था। हालांकि, मुंबई पुलिस, महाराष्ट्र वन विभाग और वन्यजीव रक्षकों की सतर्कता से घायल सियार को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया।

रेस्क्यू की घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। स्थानीय नागरिकों के बीच इस गोल्डन जैकाल को ‘वडाला का वुल्फ’ भी कहा जा रहा है।

कुत्तों के झुंड ने घेरा

जानकारी के अनुसार, यह गोल्डन जैकाल भोजन की तलाश में या भटकते हुए वडाला स्टेशन के पास मानव बस्ती वाले इलाके में पहुंच गया था। इसी दौरान आवारा कुत्तों के एक झुंड ने उसे घेर लिया और उस पर हमला करने की कोशिश की।

कुत्तों से बचने के दौरान सियार के पैर में गंभीर चोट लग गई। घायल होने के बाद वह काफी थक गया और एक स्थान पर फंसकर पड़ा रहा।

वन्यजीव रक्षक की सूचना पर शुरू हुआ रेस्क्यू

स्थानीय नागरिकों और वन्यजीव रक्षक अभिरूप कदम को घटना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने तत्काल मदद के लिए कदम उठाया। सूचना मिलने पर मुंबई पुलिस, महाराष्ट्र वन विभाग और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।

सभी एजेंसियों ने समन्वय के साथ कार्रवाई करते हुए घायल गोल्डन जैकाल को सुरक्षित जाल की मदद से पकड़ा। रेस्क्यू के बाद उसे प्राथमिक उपचार दिया गया।

वन विभाग को सौंपा गया घायल सियार

प्राथमिक उपचार के बाद गोल्डन जैकाल की हालत स्थिर बताई गई। आगे के पुनर्वास और उसे उसके प्राकृतिक अधिवास में सुरक्षित छोड़ने की प्रक्रिया के लिए वन्यजीव को वन विभाग के हवाले कर दिया गया है।

मैंग्रोव और खाड़ी क्षेत्रों में मिलते हैं गोल्डन जैकाल

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मुंबई शहर के शिवड़ी, वडाला, विक्रोली और भांडुप के मैंग्रोव तथा खाड़ी क्षेत्रों में गोल्डन जैकाल प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते शहरीकरण और प्राकृतिक अधिवास के नुकसान के कारण ये जंगली जानवर कई बार भोजन या सुरक्षित जगह की तलाश में शहर और रेलवे ट्रैक की ओर भटक जाते हैं। ऐसे मामलों में वन विभाग और वन्यजीव बचाव दल की त्वरित कार्रवाई जानवर और आम लोगों दोनों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होती है।

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