पुणे: कात्रज घाट में 1,000 पेड़ काटने पर बवाल, वन विभाग के फैसले पर उठे गंभीर सवाल; जानें पूरी जानकारी

Pune Forest Department: पुणे के कात्रज घाट में वन विभाग द्वारा 1,000 पेड़ हटाए जाने पर पर्यावरणविदों ने सवाल उठाए हैं। दावा है कि देशी पौधे लगाए जाएंगे, लोग वन्यजीवों के नुकसान को लेकर चिंतित हैं।
Pune Katraj Ghat Tree Cutting
कात्रज घाट में करीब तीन एकड़ वन क्षेत्रप्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स: AI
Published on: 
Updated on: 

Pune Katraj Ghat Tree Cutting: पुणे शहर में बढ़ते प्रदूषण और घटते हरित क्षेत्र के बीच कात्रज घाट में करीब तीन एकड़ वन क्षेत्र से लगभग 1,000 पेड़ हटाए जाने की कार्रवाई शुरू होने से पर्यावरण को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

वन विभाग का कहना है कि हटाए जा रहे पेड़ विदेशी प्रजातियों के हैं और इनके स्थान पर देशी प्रजातियों के पेड़ लगाए जाएंगे।

वन विभाग ने इस क्षेत्र में करीब 30 हजार देशी पेड़ लगाने की योजना बताई है। हालांकि, पर्यावरणप्रेमियों का सवाल है कि वर्षों से खड़े पेड़ों को हटाकर नए पौधे लगाने से मौजूदा हरित आवरण और वन्यजीवों के आवास की तत्काल भरपाई कैसे होगी।

पेड़ हटाने के मानकों पर सवाल

कात्रज घाट पुणे शहर के महत्वपूर्ण हरित क्षेत्रों में शामिल है। यहां पक्षियों, छोटे स्तनधारियों और विभिन्न सरीसृपों का प्राकृतिक आवास है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में एक साथ बड़ी संख्या में पेड़ हटाए जाने से इस जैव विविधता पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर पर्यावरणप्रेमियों ने चिंता जताई है।

पर्यावरणप्रेमियों का कहना है कि विदेशी प्रजाति के पेड़ों को हटाने का निर्णय लिया गया है तो इसके लिए वैज्ञानिक अध्ययन, प्रजातिवार सर्वेक्षण और पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

Pune Katraj Ghat Tree Cutting
नागपुर MLC चुनाव: टिकट पर महामंथन, नितिन गडकरी- देवेंद्र फडणवीस की बैठक, क्या बगावत का है डर

अपेक्षित परिणाम नहीं

पुणे शहर के पर्यावरण प्रेमियों का सवाल है कि पेड़ों को हटाने से पहले यह तय किया गया है या नहीं कि इन पर कितने पक्षी और छोटे जीव निर्भर हैं।

कात्रज घाट स्वच्छता अभियान के संस्थापक विक्रांत सिंह ने कहा कि विकास या पेड़ों की प्रजाति बदलने के नाम पर यदि प्राकृतिक आवास प्रभावित होता है, तो वन संरक्षण की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

उनके अनुसार, तलेगांव टेकड़ी पर भी इसी तरह का प्रयोग किया गया था, लेकिन 4 वर्ष बाद भी वहां अपेक्षित परिणाम नहीं दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में पेड़ हटाने से पहले पूरी प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता जरूरी है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com