BMC Suburban Hospitals CDST TB Culture Lab Proposal: मुंबई उपनगरीय इलाकों में बीएमसी के एक भी अस्पताल में सीडीएसटी लैब नहीं है। टीबी की जांच के लिए ये लैब काफी अहम होती है ऐसे में लैब के ना होने की वजह से उपनगरीय इलाकों के मरीजों को जांच की रिपोर्ट के लिए शहर के दूसरे बड़े बीएमसी अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिसमे लंबा वक्त लगता है।
लेकिन आने वाले वक्त में मरीजों की इस दिक्कत को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन की तरफ से बीएमसी के पास सीडीएसटी लैब का प्रस्ताव भेजा गया है। जिसके जल्द ही पास होने की उम्मीद की जा रही है। प्रस्ताव पास होने के बाद अस्पताल में लैब के निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा।
कल्चर एंड ससेप्टिबिलिटी टेस्टिंग यानी सीडीएसटी लैब यह जांच करती है कि मरीजों में टीबी का बैक्टीरिया किन-किन दवाओं से ठीक हो सकता है और किन दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो चुका है।
यह लैब मुख्य रूप से मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट टीबी और एक्सटेंसिवली ड्रग रेजिस्टेंट टीबी के सटीक इलाज के लिए दवाई का कॉम्बिनेशन तय करने का काम करती है। जो टीबी के मरीजों के उपचार के लिए बेहद आवश्यक है। इस तरह के लैब की सुविधा जेजे, नायर और केईएम जैसे अस्पतालों में मौजूद है।
सायन हॉस्पिटल में इसका निर्माण कार्य चल रहा है जो जल्द ही मरीजों के लिए शुरू कर दी जाएगी। दहिसर से बांद्रा तक के टीबी मरीजों के नमूनों को इस जांच के लिए हिंदुजा अस्पताल, नायर हॉस्पिटल और अन्य हॉस्पिटलों में भेजा जाता था।
पर सायन हॉस्पिटल और कूपर हॉस्पिटल में सीडीएसटी लैब शुरू हो जाने के बाद उपनगरीय इलाकों के टीबी के मरीजों को जांच के लिए लंबा इंतजार नहीं करना होगा। साथी मरीजों का उपचार भी जल्द शुरू हो सकेगा।
मुंबई शहर में डिस्ट्रिक्ट टीबी कंट्रोल सोसाइटी से मिली जानकारी के मुताबिक मुंबई में टीची मरीजों की संख्या को देखते हुए कूपर और सायन हॉस्पिटल में इस कल्चर लैब का निर्माण किए जाने का निर्णय लिया गया था।
सायन में लैब का निर्माण शुरू हो गया है और कूपर में प्रस्ताव के पास होते ही लैब निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा।