

Mumbai Healthcare News: मुंबई के लोकमान्य तिलक सायन हॉस्पिटल में टीबी से पीड़ित मरीजों के लिए राहत भरी खबर आई है। अस्पताल परिसर में बहुप्रतीक्षित 'कल्चर एंड ससेप्टिबिलिटी टेस्टिंग' (CDST) लैब का निर्माण कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है। इस अत्याधुनिक लैब के शुरू होने से अब मरीजों को अपनी जांच रिपोर्ट के लिए हफ्तों का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और उनका सटीक इलाज बिना किसी देरी के शुरू हो सकेगा।
कल्चर एंड ससेप्टिबिलिटी टेस्ट यह जांचने में बेहद कारगर होता है कि मरीज के शरीर में टीबी का बैक्टीरिया किन-किन दवाओं से ठीक हो सकता है और किन दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो चुका है। यह लैब विशेष रूप से मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट टीबी और एक्सटेंसिवली ड्रग रेजिस्टेंट टीबी के गंभीर मरीजों के लिए सही दवाइयों का कॉम्बिनेशन तय करने में अहम भूमिका निभाती है।
वर्तमान में मुंबई के जेजे, नायर और केईएम अस्पतालों में CDST लैब की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन सायन हॉस्पिटल में यह लैब न होने के कारण मरीजों के सैंपल बाहर 'हिंदुजा अस्पताल' भेजे जाते थे। इस प्रक्रिया में अत्यधिक समय लगता था, जिससे मरीजों का इलाज शुरू होने में देरी होती थी। वर्ष 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, सायन अस्पताल में हर साल औसतन 15,000 लोगों की टीबी जांच होती है, जिनमें से लगभग 10 फीसदी मरीज पॉजिटिव पाए जाते हैं। अब इन 1,500 मरीजों को अस्पताल में ही मुफ्त और तुरंत जांच सुविधा मिलेगी।
मुंबई डिस्ट्रिक्ट टीबी कंट्रोल सोसाइटी के अनुसार, सायन और आसपास के घने इलाकों में टीबी के बढ़ते मामलों को देखते हुए इस लैब की स्थापना की गई है। तत्कालीन डीन डॉ. मोहन जोशी द्वारा जुलाई 2025 में इस प्रोजेक्ट के लिए टेंडर जारी किया गया था। लैब का ढांचा पूरी तरह तैयार है और जल्द ही इसमें टेस्टिंग की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू कर दी जाएगी, जिससे मध्य मुंबई के हजारों नागरिकों को सीधे तौर पर बेहतर स्वास्थ्य लाभ मिलेगा।