सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद बीएमसी ने बोरीवली में 27 अवैध निर्माण हटाए।
बेस्ट बस डिपो के लिए आरक्षित 3,400 वर्ग मीटर जमीन अतिक्रमण मुक्त हुई।
बीएमसी पर ₹5 लाख जुर्माना, अधिकारियों को निलंबित करने की मांग उठी।
Mumbai BMC Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद आखिरकार बीएमसी प्रशासन हरकत में आ गया। बोरीवली पूर्व में BEST बस डिपो के लिए आरक्षित जमीन से अतिक्रमण हटाने में विफल रहने पर अदालत की फटकार के बाद बुधवार सुबह बीएमसी ने बड़ा अभियान चलाया।
इस दौरान 27 व्यावसायिक ढांचों को ध्वस्त कर करीब 3,400 वर्ग मीटर जमीन अतिक्रमण मुक्त कराई गई। बीएमसी ने सुप्रीम कोर्ट को भी जानकारी दी कि विवादित भूखंड से सभी अतिक्रमित निर्माण हटा दिए गए हैं।
मुंबई बीएमसी के आर मध्य विभाग ने बोरीवली पूर्व के स्वामी विवेकानंद मार्ग स्थित भूखंड पर यह कार्रवाई की। नगर सर्वेक्षण क्रमांक 15 और नगर नियोजन योजना-2 के अंतर्गत आने वाली भूखंड संख्या 7बी की जमीन BEST बस डिपो के लिए आरक्षित है। यहां लंबे समय से व्यावसायिक अतिक्रमण था। पुलिस बंदोबस्त के बीच प्रशासन ने विशेष अभियान चलाकर सभी 27 ढांचे हटा दिए।
अतिक्रमण हटाने के अभियान में बीएमसी के इंजीनियरों और कर्मचारियों के साथ करीब 70 मजदूर शामिल थे। कार्रवाई के लिए दो जेसीबी मशीनों और चार डंपरों का इस्तेमाल किया गया। पुलिस बल की मौजूदगी में पूरी प्रक्रिया पूरी की गई। अब इस जमीन का इस्तेमाल BEST बस डिपो के मूल उद्देश्य के लिए करने का रास्ता साफ हुआ है।
इस मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमण नहीं हटाने पर बीएमसी को कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत ने पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाने के साथ बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े का वेतन रोकने का निर्देश दिया था।
बुधवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने बीएमसी के वरिष्ठ अधिवक्ता आर.पी. भट्ट ने बताया कि सभी अतिक्रमित निर्माण हटा दिए गए हैं। उन्होंने पिछली सुनवाई में अधिकारियों का बचाव करने के लिए माफी भी मांगी।
बुधवार शाम मुंबई बीएमसी की स्थायी समिति की बैठक में विधि विभाग के संबंधित अधिकारियों को निलंबित करने की मांग उठी। समिति का आरोप था कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण अदालत में बीएमसी का पक्ष प्रभावी तरीके से नहीं रखा गया।
भाजपा के पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी भी कथित भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ धरने पर बैठ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने बिल्डर को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से अदालत के सामने मामले के महत्वपूर्ण तथ्यों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत नहीं किया। हालांकि, ये उनके द्वारा लगाए गए आरोप हैं। बीएमसी को अब कार्रवाई के अनुपालन से संबंधित हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करना होगा।