

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद बीएमसी ने बोरीवली में 27 अवैध ढांचे ध्वस्त किए।
बस अड्डे के लिए आरक्षित 3,400 वर्ग मीटर भूखंड से हटाया अतिक्रमण।
आदेश की अवहेलना पर बीएमसी आयुक्त का वेतन रोकने और 5 लाख रुपये जुर्माने का आदेश।
Mumbai BMC Supreme Court Contempt Ashwini Bhide: सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने आखिरकार बोरीवली पूर्व में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की है। बुधवार, 4 नवंबर को मनपा ने स्वामी विवेकानंद रोड स्थित एक आरक्षित भूखंड से 27 व्यावसायिक ढांचों को हटा दिया।
यह जमीन बेस्ट (BEST) बस अड्डे के निर्माण के लिए आरक्षित है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मनपा आयुक्त को अवमानना नोटिस जारी करने और वेतन रोकने का आदेश देने के अगले ही दिन यह कार्रवाई की गई।
मुंबई बीएमसी के अनुसार, बोरीवली पूर्व के स्वामी विवेकानंद रोड पर स्थित 3,400 वर्ग मीटर का भूखंड टाउन प्लानिंग स्कीम-2 के तहत बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (BEST) के बस अड्डे के लिए आरक्षित है। इस जमीन पर बने 27 व्यावसायिक ढांचों को हटाने के लिए आर-सेंट्रल वार्ड की ओर से विशेष अभियान चलाया गया।
अतिक्रमण हटाने की इस कार्रवाई में मनपा के करीब 70 कर्मचारी और श्रमिक शामिल हुए। अभियान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया था। मुंबई मनपा प्रशासन ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत सभी 27 व्यावसायिक ढांचों को हटाकर भूखंड को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई की।
इस मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने मनपा आयुक्त अश्विनी भिड़े को अवमानना नोटिस जारी किया था। अदालत ने नवंबर महीने का उनका वेतन रोकने के साथ संबंधित अन्य मनपा अधिकारियों का वेतन भी रोकने का आदेश दिया था। अदालत ने अपने पूर्व निर्देशों का पालन करने के लिए बीएमसी की ओर से मांगे गए 30 दिन के अतिरिक्त समय को भी खारिज कर दिया था।
अतिक्रमण नहीं हटाने और अदालत के निर्देशों का पालन नहीं करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बीएमसी पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। बोरीवली के इस भूखंड को लेकर मनपा और एक निजी डेवलपर के बीच लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा था।
अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित डेवलपर को प्रशासनिक भवन के साथ इस भूखंड को अतिक्रमण मुक्त कराकर मनपा को सौंपने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद कार्रवाई में देरी होने पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया। अब बीएमसी की कार्रवाई के बाद बेस्ट बस अड्डे के लिए आरक्षित जमीन खाली कराने का रास्ता साफ हुआ है।