देवेंद्र फड़णवीस-सुनेत्रा पवार (सोर्सः सोशल मीडिया)
मुंबई

मुंबई 3.0 और 4.0 की मास्टर प्लानिंग को रफ्तार ! MMRDA ने किया 2,008 वर्ग किमी का ELU सर्वे

MMRDA ELU Survey: MMRDA ने मुंबई 3.0 और 4.0 की मास्टर प्लानिंग के लिए 2,008 वर्ग किमी क्षेत्र और 565 गांवों का Existing Land Use (ELU) सर्वे पूरा किया है।

सूर्यप्रकाश मिश्र, आंचल लोखंडे

Mumbai Metropolitan Region: मुंबई महानगर क्षेत्र के सुनियोजित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने मुंबई 3.0 और मुंबई 4.0 के तहत तीन मौजूदा भूमि उपयोग (Existing Land Use-ELU) रिपोर्ट तैयार कर ली हैं।

रिकॉर्ड ढाई माह में पूरा

करीब 2,008 वर्ग किमी क्षेत्र और 565 गांवों को कवर करने वाली यह प्रक्रिया रिकॉर्ड ढाई महीने में पूरी की गई। इन रिपोर्टों में KSC न्यू टाउन, पालघर का नॉर्दर्न एक्सटेंडेड नोटिफाइड एरिया और रायगढ़ का सदर्न एक्सटेंडेड नोटिफाइड एरिया , जिसमें अलीबाग भी शामिल है, का अध्ययन किया गया है। रिपोर्टों का उद्देश्य भविष्य की भूमि उपयोग योजना, बुनियादी ढांचे, आवास, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण के लिए वैज्ञानिक आधार तैयार करना है।

अत्याधुनिक तकनीक डिजिटल डेटाबेस

MMRDA ने इन क्षेत्रों की मैपिंग के लिए एरियल LiDAR, हाई-रिजॉल्यूशन इमेजरी, DGPS ग्राउंड कंट्रोल और GIS तकनीक का इस्तेमाल किया। इसके साथ कैडस्ट्रल रिकॉर्ड और जमीनी सत्यापन को भी जोड़ा गया। इससे बस्तियों, परिवहन ढांचे, प्राकृतिक संसाधनों, भूमि उपयोग और भौगोलिक विशेषताओं का विस्तृत डिजिटल डेटाबेस तैयार हुआ है। KSC न्यू टाउन में पेन, उरण और पनवेल तालुका के 124 गांवों और करीब 324 वर्ग किमी क्षेत्र का अध्ययन किया गया है। नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, JNPA, अटल सेतु और विरार-अलीबाग मल्टी-मोडल कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं के कारण यह क्षेत्र भविष्य के शहरी, औद्योगिक, लॉजिस्टिक्स और व्यावसायिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पालघर के 204 गांव शामिल

पालघर के मुंबई 4.0 क्षेत्र में करीब 1,007 वर्ग किमी और 224 गांव शामिल हैं। यहां जंगल, नदियां, कृषि क्षेत्र, समुद्र तट, मैंग्रोव, आर्द्रभूमि और आदिवासी बस्तियां मौजूद हैं। वहीं दक्षिणी ENA-अलीबाग में करीब 677 वर्ग किमी और 217 गांवों का अध्ययन किया गया है। समुद्र तट, किले, पर्यटन क्षेत्र और औद्योगिक गतिविधियां इस इलाके की प्रमुख विशेषताएं हैं।

डिजिटल ट्विन और भविष्य की योजना पर जोर

MMRDA इन ELU डेटाबेस का इस्तेमाल डिजिटल ट्विन और सिनेरियो मॉडलिंग के लिए करने की योजना बना रहा है। इससे भविष्य की परियोजनाओं से यातायात, बुनियादी ढांचे की मांग, बाढ़ जोखिम और सार्वजनिक सेवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा। रिपोर्ट के अनुसार, अध्ययन क्षेत्र का करीब 45 प्रतिशत हिस्सा वन और हरित क्षेत्र की श्रेणी में आता है। MMRDA ने मैंग्रोव, आर्द्रभूमि, नदियों, जलस्रोतों और प्राकृतिक जल निकासी प्रणालियों के संरक्षण पर जोर दिया है।

सीएम,डीसीएम ने की सराहना

एमएमआरडीए द्वारा मात्र ढाई माह के रिकॉर्ड समय में मुंबई 3.0 और 4.0 की मास्टर प्लानिंग के लिए सीएम देवेंद्र फडणवीस, डीसीएम एकनाथ शिंदे ने एमएमआरडीए की सराहना की है। MMRDA के महानगर आयुक्त डॉ. संजय मुखर्जी के अनुसार, इस स्पेशल डेटाबेस को भविष्य के मास्टर प्लान, प्रस्तावित भूमि उपयोग, परिवहन और बुनियादी ढांचे के मॉडलिंग के लिए व्यावहारिक नियोजन उपकरण में बदला जाएगा। इसका लक्ष्य रोजगार, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और मनोरंजन जैसी सुविधाओं को बेहतर कनेक्टिविटी के साथ विकसित करना और अधिक रहने योग्य MMR तैयार करना है।

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