इलेक्ट्रिक बस व बैठक में माैजूद परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक व अन्य (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

MSRTC का मेगा प्लान: अब बस डिपो में पेट्रोल नहीं, चार्जिंग स्टेशनों पर जोर; 50% बसें होंगी इलेक्ट्रिक

MSRTC के बेड़े को भविष्य के लिए तैयार करने के उद्देश्य से परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने सभी बस डिपो में EV चार्जिंग बुनियादी ढांचा विकसित करने के निर्देश दिए हैं।

आकाश मसने

MSRTC Electric Bus Charging: परिवहन मंत्री और MSRTC के अध्यक्ष प्रताप सरनाईक ने निगम को भविष्य की जरूरतों के अनुसार बस डिपो में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए बुनियादी सुविधाएं स्थापित करने का निर्देश दिया है।, इसका मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण के अनुकूल बनाना और भविष्य में 50% बेड़े को इलेक्ट्रिक करना है।

पर्यावरण के अनुकूल परिवहन की ओर बड़ा कदम

महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) अपने बेड़े को आधुनिक बनाने और वायु प्रदूषण को कम करने के लिए चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बसों को शामिल कर रहा है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने स्पष्ट किया है कि इन इलेक्ट्रिक बसों का सफल और निर्बाध संचालन पूरी तरह से डिपो और परिचालन केंद्रों पर मजबूत चार्जिंग बुनियादी ढांचे की उपलब्धता पर निर्भर करता है। यह कदम न केवल यात्रियों के लिए सफर सुगम बनाएगा, बल्कि निगम की पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को पूरा करने की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगा।

50% बेड़े को इलेक्ट्रिक बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य

MSRTC की दीर्घकालिक योजना के मुताबिक, आने वाले समय में निगम की कुल बसों में से लगभग 50 प्रतिशत बसें इलेक्ट्रिक होने की उम्मीद है। इस बड़े लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मौजूदा डिपो को इलेक्ट्रिक चार्जिंग सिस्टम के अनुकूल बनाने की प्रक्रिया तुरंत शुरू करें। बुनियादी ढांचे के इस कार्य को बिना किसी देरी के पूरा करने पर जोर दिया गया है ताकि भविष्य में परिचालन संबंधी कोई समस्या न आए।

पावर सप्लाई और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करते समय केवल वर्तमान ही नहीं, बल्कि भविष्य की बिजली मांग का भी आकलन किया जा रहा है। संबंधित विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे बिजली आपूर्ति क्षमता बढ़ाने, पुराने ट्रांसफार्मर को अपग्रेड करने और सभी आवश्यक विद्युत सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करें। चार्जिंग सिस्टम को इतना मजबूत बनाया जाएगा कि अत्यधिक उपयोग के बावजूद सेवाओं में कोई रुकावट न आए। इसके अलावा, मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत ईंधन और ऊर्जा बुनियादी ढांचा विकसित करते समय पारंपरिक पेट्रोल-डीजल स्टेशनों के बजाय इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशनों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

हरित ऊर्जा और भविष्य की राह

यह पूरी कवायद यात्री परिवहन से कहीं बढ़कर हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की एक बड़ी मुहिम है। 20 जनवरी को आधिकारिक रूप से हस्ताक्षरित निर्देशों के बाद अब पूरे महाराष्ट्र में MSRTC के नेटवर्क को पर्यावरण संरक्षण के अनुकूल बदला जा रहा है।, अधिकारियों का मानना है कि चार्जिंग स्टेशनों का यह विस्तार न केवल MSRTC की बसों के लिए मददगार होगा, बल्कि राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति लोगों का विश्वास भी बढ़ाएगा।

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