Sandeep Deshpande On MPSC Drug Inspector Paper Leak: महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) द्वारा आयोजित ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। इस मामले पर अब राज्य में सियासत तेज हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेता संदीप देशपांडे ने राज्य और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कई सवाल पूछे हैं।
राज ठाकरे की पार्टी MNS के नेता संदीप देशपांडे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयानों और संसद में पारित नए कानून का हवाला देते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पिछले एक महीने से लगातार यह दावा कर रहे हैं कि उनकी सरकार पेपर लीक जैसे संवेदनशील मामलों को लेकर बेहद गंभीर है। हाल ही में संसद में ऐसे अपराधों से सख्ती से निपटने के लिए एक सख्त कानून भी पास किया गया है।
संदीप देशपांडे ने सवाल उठाया कि महाराष्ट्र में MPSC ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा का पेपर लीक होना और पुलिस जांच में भी यह स्वीकार किया जाना कि परीक्षा से दो दिन पहले ही प्रश्न-पत्र बाहर आ चुका था, एक अत्यंत गंभीर मामला है। जब खुद पुलिस और संबंधित एजेंसियों ने यह मान लिया है कि पेपर लीक हुआ था, तो अब तक इस मामले में आधिकारिक FIR दर्ज क्यों नहीं की गई?
मनसे नेता ने आगे कहा कि प्राथमिक जांच में तथ्य सामने आने के बावजूद FIR न दर्ज करना कई तरह के संदेह पैदा करता है। उन्होंने सरकार से सीधा सवाल पूछा कि आखिर प्रशासन किसे बचाने की कोशिश कर रहा है? क्या इस पेपर लीक सिंडिकेट में सरकारी एजेंसियों या अधिकारियों की कोई प्रत्यक्ष मिलीभगत है?
संदीप देशपांडे ने मांग की है कि इस पूरे मामले की बिना किसी दबाव के निष्पक्ष और गहराई से जांच होनी चाहिए ताकि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले असली गुनहगारों को बेनकाब किया जा सके।
वहीं, महाराष्ट्र में मराठी भाषा के मुद्दे पर भी मनसे नेता संदीप देशपांडे ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मनसे मराठी भाषा को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है। कुछ दिन पहले, मुझे लगता है दो या तीन दिन पहले, हमने हिंदी बोलने वाले ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों के लिए क्लास आयोजित की थी। लगभग 5,000 ऑटो-रिक्शा मालिक हमारे पास आए और परीक्षा दी। हमने उन्हें मराठी सिखाई।
राज ठाकरे की पार्टी के नेता ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने कुछ ऐसे तत्व खड़े किए हैं जो 'मराठी मानुष' और दूसरी भाषाएं बोलने वाले लोगों के बीच साफ तौर पर बंटवारा पैदा करना चाहते हैं। मुझे लगता है कि इसके पीछे उनका यही मकसद है। हम उनकी इन चालों में नहीं फंसने वाले हैं। 95 प्रतिशत ऑटो रिक्शा चलाने वाले लोग मराठी सीखने के लिए तैयार हैं, केवल कुछ लोग हैं जो इसे सीखना नहीं चाहते हैं।
इसके अलावा, मुंबई में एक कॉन्ट्रैक्टर की आत्महत्या के मामले पर भी संदीप देशपांडे ने राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में स्थिति बहुत दुखद है। आप महाराष्ट्र के विकास की बात तो करते हैं, लेकिन जो लोग विकास का काम कर रहे हैं, उन्हें पैसे नहीं मिल रहे हैं। महाराष्ट्र कभी आर्थिक रूप से मजबूत और स्वतंत्र राज्य हुआ करता था। अगर आप कॉन्ट्रैक्टरों को भुगतान नहीं करेंगे, तो विकास के काम कैसे होंगे?