Marathwada Dams Dry: महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में मानसून की बेरुखी ने आम जनता से लेकर प्रशासन तक की चिंताएं बढ़ा दी हैं। जून का महीना बीतने को है, लेकिन उम्मीद के मुताबिक बारिश न होने की वजह से पूरे क्षेत्र में जल संकट गहराने लगा है। एक आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, मराठवाड़ा की 11 प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं में जल स्तर घटकर महज 33.59 प्रतिशत रह गया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि क्षेत्र के दो बड़े जलाशय पूरी तरह से सूख चुके हैं।
एक आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, छत्रपति संभाजीनगर समेत 8 जिलों वाले मराठवाड़ा क्षेत्र में जून महीने में होने वाली अनुमानित वर्षा की तुलना में केवल 79.6 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है। क्षेत्र में आम तौर पर होने वाली 129.5 मिलीमीटर की औसत बारिश के मुकाबले अब तक केवल 103.1 मिलीमीटर वर्षा हुई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पेयजल, सिंचाई और औद्योगिक आवश्यकताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण इन 11 प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं की कुल उपयोगी भंडारण क्षमता 182.07 अरब घन फुट (TMC) है। 29 जून 2026 तक इन जलाशयों में उनकी क्षमता का केवल 33.59 प्रतिशत पानी बचा था, जो पिछले साल इसी दिन दर्ज किए गए 42.85 प्रतिशत (78.01 टीएमसी) के मुकाबले काफी कम है।
सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो धाराशिव और हिंगोली जिलों में स्थिति सबसे ज्यादा डरावनी है। धाराशिव की सीना कोलेगांव परियोजना में जल स्तर शून्य से नीचे यानी -2.87 प्रतिशत पहुंच गया है। वहीं, हिंगोली की सिद्धेश्वर परियोजना पूरी तरह खाली हो चुकी है, जबकि पिछले साल इसी समय इसमें 21.39 प्रतिशत पानी मौजूद था। इसके अलावा, बीड जिले की माजलगांव परियोजना में 18.75 प्रतिशत और मांजरा परियोजना में केवल 19.12 प्रतिशत पानी ही शेष है।
बता दें कि महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई समेत पूरे मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) को पीने का पानी उपलब्ध कराने वाले 7 जलाशलों में भी जलसंकट गहरा गया है। इन सात जलाशयों में पानी कुल भंडारण क्षमता का 7 प्रतिशत से भी कम रह गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है। मुंबई और उसके महानगरीय क्षेत्र को पेयजल उपलब्ध कराने वाली जलाशय प्रणाली में भातसा, अपर वैतरणा, मोडक सागर, तानसा, मध्य वैतरणा, तुलसी और विहार जलाशय शामिल हैं।
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बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार सुबह छह बजे तक इन सातों जलाशयों में कुल 1,00,279 मिलियन लीटर पानी मौजूद था, जो उनकी कुल भंडारण क्षमता का केवल 6.93 प्रतिशत है। इसके विपरीत, पिछले वर्ष इसी अवधि में इन जलाशयों में कुल क्षमता का 39.5 प्रतिशत यानी 5,71,670 मिलियन लीटर पानी था।