Auto Drivers Returning UP-Bihar Viral Video: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में गैर-मराठी ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के खिलाफ क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) की सख्त कार्रवाई का दौर लगातार तीसरे दिन भी जारी है। इस बीच मुंबई और आसपास के इलाकों से सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसने इंटरनेट पर नई बहस छेड़ दी है। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर ट्रेन खड़े होने के दौरान कुछ लोग ऑटो-रिक्शा को उठाकर ट्रेन के एसएलआर यानी पार्सल डिब्बे के अंदर लोड कर रहे हैं।
इस वीडियो को शेयर करते हुए सोशल मीडिया पर एक अनोखा दावा किया जा रहा है। यूजर्स का कहना है कि जो काम मनसे प्रमुख राज ठाकरे इतने सालों में नहीं कर पाए, वो काम एकनाथ शिंदे की शिवसेना नेता और मंत्री प्रताप सरनाईक ने कर दिखाया है।
दावा किया जा रहा है कि महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा, कैब ड्राइवरों के लिए मराठी अनिवार्य करने के फैसले और RTO की सख्त कार्रवाई, चालान के डर और मराठी भाषा सीखने के बढ़ते दबाव के कारण UP और बिहार से आए ऑटो चालक अब मुंबई छोड़कर अपने-अपने राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेन में कुछ लोग ऑटो-रिक्शा को उठाकर एसएलआर यानी पार्सल डिब्बे के अंदर लोड कर रहे हैं। दावा किया जा रहा कि गैर मराठी ऑटो-रिक्शा चालक मराठी भाषा नहीं आने और कार्रवाई के डर से यूपी-बिहार लौट रहे हैं।
हालांकि वायरल दावों के बीच इस वीडियो का एक दूसरा और व्यावहारिक पहलू भी सामने आ रहा है। रेलवे नियमों के जानकार और अधिकारियों के अनुसार, ट्रेन के पार्सल डिब्बे में ऑटो-रिक्शा लोड करना कोई नई या असामान्य बात नहीं है। भारतीय रेलवे के पार्सल विभाग के जरिए यात्री या व्यापारी अपनी टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर गाड़ियों को एक शहर से दूसरे शहर आसानी से बुक करके भेजते हैं। यह एक सामान्य पार्सल बुकिंग प्रक्रिया भी हो सकती है।
इस वीडियो के सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स कह रहे है कि मराठी अस्मिता का कार्ड खेलकर राजनीति करने वाले राज ठाकरे जो नहीं कर पाए, वो एकनाथ शिंदे की शिवसेना के प्रताप सरनाईक ने कर दिखाया।
बता दें राज ठाकरे शुरू से महाराष्ट्र में मराठी अस्मिता की राजनीति करते आए हैं। राज ठाकरे के महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं कई बार गैर मराठी लोगों को मराठी बोलने के लिए मजबूर करते दिखाई देते है। महाराष्ट्र में MNS कार्यकर्ताओं के द्वारा मराठी बोलने को लेकर कई लोगों से मारपीट के वीडियो भी सामने आते रहते हैं।