Manoj Jarange Fast Mastermind: महाराष्ट्र के सांस्कृतिक कार्य मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता आशीष शेलार ने मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मराठा आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटील की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शेलार ने आरोप लगाया कि 16 सितंबर 2026 को जरांगे द्वारा चलाए जा रहे इस आंदोलन के पीछे कोई पर्दे के पीछे से इशारे करने वाला मास्टरमाइंड या अदृश्य राजनीतिक ताकत काम कर रही है।
भाजपा नेता ने सीधा दावा किया कि जिस तरह से यह पूरा आंदोलन चलाया जा रहा है, उससे विशुद्ध राजनीति की गंध आ रही है।
आशीष शेलार ने जरांगे के सिलेक्टिव रुख पर सवाल उठाते हुए तीखे प्रश्न दागे। उन्होंने पूछा कि पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार, उद्धव ठाकरे, सुशील कुमार शिंदे और कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने कार्यकालों के दौरान मराठा समाज के आरक्षण और कल्याण के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए?
शेलार के अनुसार, तत्कालीन विपक्षी सरकारों ने न तो मराठा समाज के लिए स्थायी कानून बनाए, न अदालत में आरक्षण को मजबूती से टिकाया और न ही युवाओं के लिए जरूरी योजनाएं लागू कीं।
लेकिन इसके बावजूद मनोज जरांगे ने कभी भी उन पूर्व मुख्यमंत्रियों और विपक्षी नेताओं के खिलाफ एक शब्द तक नहीं बोला। शेलार ने सवाल किया कि आखिर जरांगे इन नेताओं की नाकामियों पर पूरी तरह मौन क्यों साधे हुए हैं?
भाजपा नेता ने कहा कि महायुति सरकार ने वास्तव में मराठा समाज को न्याय दिलाने का काम किया, उसी सरकार के शीर्ष नेताओं के खिलाफ जरांगे अपमानजनक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। शेलार ने याद दिलाया कि महायुति सरकार ने ही मराठा समाज को SCBC आरक्षण का कानून दिया, EWS में संरक्षण दिया, मराठा विद्यार्थियों के लिए हॉस्टल व स्कॉलरशिप की व्यवस्था की और न्यायालय में आरक्षण को कानूनी रूप से टिकाकर दिखाया।
इसके बावजूद जरांगे द्वारा मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्रियों के खिलाफ ऐसी अशिष्ट शब्दावली का प्रयोग करना छत्रपति शिवाजी महाराज के सुसंस्कृत महाराष्ट्र की परंपरा के बिल्कुल विपरीत है और इसे आगे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शेलार ने आंकड़े रखते हुए स्पष्ट किया कि महायुति सरकार जरांगे की 14 में से 13 मांगों को पहले ही स्वीकार कर पूरा कर चुकी है। जो बची हुई बातें हैं, उन पर भी राधाकृष्ण विखे पाटील के नेतृत्व वाली कैबिनेट उप-समिति सकारात्मक बातचीत के लिए तैयार है।
ऐसे में जब ज्यादातर मांगें मान ली गई हैं, तब भी गणेशोत्सव और गौरी-गणपति पर्व के दौरान मुंबई कूच करने की जिद पकड़ना पूरी तरह अतर्क, अतिवादी और श्रद्धालुओं के लिए असुविधाजनक है। शेलार ने कहा कि राज्य भर में विशेषकर मुंबई और पुणे में लाखों गणेश भक्त सड़कों पर उतरते हैं, इसलिए इस पावन त्योहार में कोई विघ्न डालना अनुचित है।
अंत में आशीष शेलार ने कहा कि जनता और मराठा समाज अब सब कुछ खुली आंखों से देख रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग इस आंदोलन की आड़ में अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने की कोशिश कर रहे हैं, उनके हाथ जलना तय है। शेलार ने जरांगे से अपनी सेहत का ध्यान रखने और बिना पुलिस अनुमति के मुंबई न आकर लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करने का नम्र निवेदन किया।