मंत्री गुलाबराव पाटिल (सोर्स: सोशल मीडिया)
मुंबई

महाराष्ट्र में पानी की कमी दूर करने के लिए मास्टर प्लान तैयार, 15 अक्टूबर तक पूरे होंगे प्रोजेक्ट्स

Maharashtra Water Scarcity Master Plan: महाराष्ट्र में पानी की कमी से निपटने के लिए मास्टर प्लान तैयार है। जल आपूर्ति मंत्री गुलाबराव पाटिल ने 15 अक्टूबर तक सभी प्लान पूरे करने के दिए निर्देश।

गोरक्ष पोफली

Gulabrao Patil Water Supply Meeting: पानी की संभावित कमी से निपटने के लिए, मौजूद पानी के सोर्स की सख्त प्लानिंग, पानी के सोर्स मज़बूत करने, नालों को गहरा करने और पानी बचाने के काम जल्दी पूरे करने, 75 परसेंट से ज़्यादा पूरे हो चुके पानी सप्लाई के प्लान तुरंत शुरू करने और टैंकरों पर निर्भरता कम करने के लिए पक्के कदम उठाने पर ज़ोर दिया जाना चाहिए। साथ ही, जल आपूर्ति और सफ़ाई मंत्री गुलाबराव पाटिल ने निर्देश दिया कि सभी ज़िलों के कमी वाले प्लान 15 अक्टूबर तक पूरे कर लिए जाएं और बिना इजाज़त पानी निकालना तुरंत बंद कर दिया जाए।

मंत्री पाटिल छत्रपति संभाजीनगर, नासिक और पुणे डिवीज़न में पानी की संभावित कमी के संबंध में सह्याद्री गेस्ट हाउस में हुई एक रिव्यू मीटिंग में बोल रहे थे। मीटिंग में राज्य मंत्री मेघना बोर्डिकर, एडिशनल चीफ सेक्रेटरी पराग जैन नैनुतिया, डिविजनल कमिश्नर, डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर, डिस्ट्रिक्ट काउंसिल के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के साथ-साथ वॉटर सप्लाई, वॉटर कंजर्वेशन, वॉटर रिसोर्स, एग्रीकल्चर और संबंधित डिपार्टमेंट के ऑफिसर शामिल हुए।

75 परसेंट से ज्यादा पूरी हो चुकी स्कीम को प्रायोरिटी

जिन वॉटर सप्लाई स्कीम का काम 75 परसेंट या उससे ज्यादा पूरा हो चुका है और मौजूद सोर्स से पानी सप्लाई करना मुमकिन है, ऐसी स्कीम को तुरंत लागू किया जाना चाहिए। अगर नल, पाइपलाइन, टैंक की जगह, एडमिनिस्ट्रेटिव अप्रूवल या दूसरी दिक्कतों के बारे में कोई टेक्निकल दिक्कतें हैं, तो उन्हें संबंधित डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के साथ कोऑर्डिनेशन करके तुरंत सॉल्व किया जाना चाहिए।

जिन गांवों में टैंकर चल रहे हैं, वहां पानी सप्लाई की जो योजनाएं पेंडिंग हैं, उन्हें खास प्राथमिकता देकर युद्धस्तर पर पूरा किया जाना चाहिए। मंत्री पाटिल ने बताया कि टैंकर शुरू करने के बजाय, सरकार एक ऐसा परमानेंट सिस्टम बनाने पर ध्यान दे रही है, जहां टैंकरों की ज़रूरत नहीं होगी।

पानी के सोर्स को मज़बूत करने में तेज़ी लाएं

जिन इलाकों में पानी की कमी है, वहां नहरों को गहरा करना, गाद निकालना, डैम, सक्शन पिट, रिचार्ज शाफ्ट, कुओं की मरम्मत और गहरा करना, कुएं खोदना, नए कुएं खोदना और पानी जमा करने की क्षमता बढ़ाना प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।

जिला प्लानिंग कमेटी, CSR, माइनिंग फंड, जलजीवन मिशन, ग्राम पंचायत, सिंचाई और दूसरे उपलब्ध फंड को पानी बचाने के कामों के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि पानी के किस सोर्स को तुरंत मज़बूत करने की ज़रूरत है, उसके हिसाब से कामों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और सबसे ज़्यादा सेंसिटिव सोर्स पर पहले काम किया जाना चाहिए।

मंत्री पाटिल ने छत्रपति संभाजीनगर डिवीजन में शिरपुर पैटर्न और पुणे डिवीजन के सतारा जिले में पानी बचाने के कामों को डॉक्यूमेंट करने और राज्य के दूसरे जिलों में इसके अनुभव का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए।

बिना इजाज़त पानी निकालना तुरंत बंद करें

नासिक डिवीज़न में पानी की कमी की संभावना को देखते हुए, पानी के सोर्स से बिना इजाज़त पानी निकालना तुरंत बंद किया जाना चाहिए। संबंधित डिपार्टमेंट डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के ज़रिए फिजिकल इंस्पेक्शन करें और अगर बिना इजाज़त कनेक्शन या पानी निकाला हुआ पाया जाता है तो नियम के मुताबिक एक्शन लें। मंत्री श्री पाटिल ने कहा कि पानी की हर बूंद बचाना ज़रूरी है।

पानी सप्लाई से जुड़ी कोई भी छोटी समस्या पेंडिंग नहीं रहनी चाहिए। रीजनल ऑफिसर सीधे गांवों में जाकर हालात का इंस्पेक्शन करें और समस्याओं को तुरंत डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर या ज़िला परिषद के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के ध्यान में लाकर उनका हल निकालें।

15 अक्टूबर तक कमी के प्लान पूरे करें

सभी जिलों के कमी के प्लान 15 अक्टूबर तक पूरे कर लिए जाने चाहिए। बारिश, ग्राउंडवाटर लेवल, मौजूद पानी का स्टोरेज, चल रहे टैंकर और पानी के सोर्स की हालत को ध्यान में रखते हुए, उन गांवों के लिए प्लानिंग की जानी चाहिए जहां अभी से कमी होने की संभावना है।

अक्टूबर से दिसंबर, जनवरी से मार्च और अप्रैल से जून के समय के लिए अलग-अलग प्लानिंग की जानी चाहिए और ज़रूरी फंड, मैनपावर और रिसोर्स उपलब्ध कराए जाने चाहिए। जल आपूर्ति, कृषि, रोजगार गारंटी, जल संरक्षण और जल संसाधन विभागों के साथ तालमेल बिठाकर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में रेगुलर मीटिंग करने के भी निर्देश दिए गए।

उपलब्ध जल भंडारण की सख्त प्लानिंग

उपलब्ध जल भंडारण की प्लानिंग सिर्फ ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि सभी संबंधित एजेंसियों की सामूहिक जिम्मेदारी है। झीलों, बांधों और दूसरे जल स्रोतों में पानी की मात्रा को ध्यान में रखते हुए, इसका कम से कम इस्तेमाल किया जाना चाहिए। भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए जरूरी जगहों पर तालाब बनाए जाने चाहिए और मौजूदा स्रोतों को मजबूत किया जाना चाहिए।

बैठक में पुणे डिवीजन के कमी वाले गांवों में जल संसाधनों की खास मरम्मत और मजबूती, सांगली में रिचार्ज शाफ्ट और सिल्ट-फ्री बांध, सोलापुर में संवेदनशील तालुकाओं के लिए समय के हिसाब से प्लानिंग और पूरे राज्य में सतारा जिले में जल संरक्षण उपायों को बढ़ाने पर फोकस किया गया।

पानी की कमी के समय नागरिकों को समय पर पानी उपलब्ध कराना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। कमी बढ़ने से पहले सभी जरूरी उपाय पूरे किए जाने चाहिए और उपलब्ध फंड का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाना चाहिए। मंत्री पाटिल ने निर्देश दिया कि पानी की कमी से राहत का काम युद्ध स्तर पर किया जाना चाहिए और नागरिकों को राहत दी जानी चाहिए।

हवा में चाकूबाजी, तेजी से नीचे आया विमान…कौन हैं भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार? जान पर खेलकर बचाई 180 की जान

यूपी पुलिस को ही भंग कर सभी केस CBI को देने पड़ेंगे क्या? सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

कांग्रेस की एकला चलो नीति पर भड़के उद्धव ठाकरे! INDIA गठबंधन की बैठक में सुनाई खरी-खोटी, दी ये सलाह

CSR घाेटाला: महाराष्ट्र समेत 4 राज्यों के 8 ठिकानों पर ED की छापेमारी, फर्जी नेटवर्क का खुलासा

किसानों को मोदी कैबिनेट का बड़ा तोहफा, MSP में बढ़ोतरी की मंजूरी; ₹2.79 लाख करोड़ के पैकेज का ऐलान