Maharashtra Tech Mission Successful In London Quantum City: महाराष्ट्र सरकार के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने 7 और 8 अक्टूबर को लंदन में क्वांटम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इन्वेस्टमेंट से जुड़े एक रणनीतिक दो दिवसीय मिशन को पूरा किया।
इस पहल का मकसद क्वांटम सिटी और यूके-महाराष्ट्र क्वांटम कॉरिडोर के लिए आधार तैयार करके महाराष्ट्र को भारत की प्रमुख क्वांटम और एआई राजधानी के तौर पर स्थापित करना है।
ग्लोबल इंडिया बिजनेस कॉरिडोर (GIBC UK) द्वारा आयोजित और संचालित इस मिशन ने महाराष्ट्र को 'द सिटी क्वांटम एंड एआई समिट' में एक अहम मंच प्रदान किया। राज्य के प्रतिनिधिमंडल में उद्योग विभाग के प्रधान सचिव पी. अनबलगन और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मुख्य निवेश सलाहकार कौस्तुभ धवसे शामिल थे।
इस मिशन के दौरान, प्रतिनिधियों ने महाराष्ट्र में एडवांस्ड डीप-टेक ऑपरेशन्स और निवेश लाने के लिए ग्लोबल सीईओ, निवेशकों और सार्वजनिक संस्थानों के प्रमुखों के साथ 13 द्विपक्षीय बैठकें कीं।
इन द्विपक्षीय बैठकों में जिन मुख्य प्रस्तावों और तकनीकी पहलों पर चर्चा की गई, उनमें मुंबई क्वांटम सुविधा, रिसर्च और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा समाधान, औद्योगिक और गवर्नेंस एप्लीकेशन, तथा वर्कफोर्स और स्टार्ट-अप सपोर्ट शामिल थे।
इस मिशन का मकसद मुंबई शहर में एक खास क्वांटम कंप्यूटिंग हब बनाना, एआई इंजीनियरिंग और रिसर्च बेस के साथ-साथ टिकाऊ और कम ऊर्जा खपत वाले डेटा सेंटर बनाना, सुरक्षित अंडरग्राउंड ट्रांसपोर्ट निर्माण के लिए क्वांटम सेंसिंग टूल लागू करना और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एडवांस्ड साइबर सिक्योरिटी सिस्टम लगाना है।
इसका मकसद निवेशकों की मंजूरी की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए AI सिस्टम लगाना, माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइज (MSME) को ग्लोबल सप्लाई चेन से जुड़ने में मदद करने के लिए एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग सेंटर बनाना और टेक्नोलॉजी स्टार्टअप के लिए खास वर्कफोर्स ट्रेनिंग प्रोग्राम और इनक्यूबेशन सपोर्ट लागू करना भी है।
इसके अलावा, सिटी ऑफ लंदन कॉर्पोरेशन के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत में महाराष्ट्र राज्य में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए फंड जुटाने के मकसद से लंदन और मुंबई के बीच एक इंस्टीट्यूशनल फाइनेंस चैनल बनाने पर भी चर्चा की गई।
GIBC की प्लानिंग के एक उदाहरण वाले अनुमान के मुताबिक, अगर प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स को औपचारिक फंडिंग मिल जाती है और वे ऑपरेशनल रूप से पूरी तरह तैयार हो जाते हैं, तो यह पहल 10 साल की अवधि में लगभग 20,000 करोड़ रुपये की कुल आर्थिक गतिविधि पैदा कर सकती है।
इस आंकड़े में निवेश, ऑपरेशनल खर्च और व्यापक आर्थिक प्रभाव शामिल हैं, और इसमें 8,000 तक प्रत्यक्ष और सहायक नौकरियां पैदा करने की क्षमता है। हालांकि, जीआईबीसी ने बताया है कि ये अनुमान केवल प्लानिंग के लिए उदाहरण हैं और ये अभी पक्के तौर पर तय की गई पूंजी या पक्की हायरिंग को नहीं दिखाते हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, अगर यह कॉरिडोर पूरी तरह से साकार हो जाता है, तो इससे स्थानीय इंजीनियरों, शोधकर्ताओं और उद्यमियों को बड़े पैमाने पर वैश्विक पहुंच मिलेगी। साथ ही, महाराष्ट्र की तकनीकी क्षमताएं, प्रशासनिक दक्षता और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की मजबूती भी बढ़ेगी।