CM Devendra Fadnavis Warns Ministers: पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल व एक केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों परिणामों में जिस तरह से बंगाल व तमिलनाडु में मुख्यमंत्रियों के अलावा दर्जनों मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा, उसने महाराष्ट्र में महायुति सरकार के माथे पर चिंता की खींच दी हैं।
इन राज्यों के चुनावी नतीजों को असर मंगलवार को हुई महाराष्ट्र सरकार की कैबिनेट बैठक में भी देखने को मिला। इन चौंकाने वाले परिणामों को देख मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महायुति में शामिल शिंदे सेना व सुनेत्रा पवार की एनसीपी को अभी से सचेत कर दिया है। उनका मानना है कि इन परिणामों से हम सबको सबक लेने की जरूरत है। अगर आने वाले वर्षों में हम जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते हैं तो फिर इस तरह के सेटबैंक का सामना हम सभी को करना पड़ सकता है।
महायुति सरकार में शामिल सभी दलों ने अपने मंत्रियों को चेतावनी देते हुए परफॉर्मेंस सुधारने की नसीहत दी है। जो मंत्री निकम्मे हैं, उन पर गाज गिर सकती है। महायुति का मानना है कि अगर 2029 में हमें वापसी करनी है तो अभी से तैयारी करनी होगी। सीएम ने मंत्रियों व नेताओं से कहा है कि वे केबिन का मोह छोड़ कर ग्राउंड लेवल पर उतरें और लोगों की समस्याएं सुलझाएं। महायुति का मानना है कि बंगाल में ममता बनर्जी व तमिलनाडु में स्टालिन की हार की बड़ी वजह जनता की नाराजगी है। ऐसे में महायुति को 2029 के लिए अभी से कमर कसनी होगी।
महायुति सरकार में शामिल सभी सहयोगी दलों को यह भी बताया गया है कि साल 2024 में हुए विधानसभा चुनावों से पहले लाडकी बहिन योजना लाकर पूरे समीकरण बदल दिए गए थे, लेकिन अब राज्य की आर्थिक स्थिति को देखते हुए 2029 में इस तरह की कोई गेम चेंजर योजना लाना मुश्किल है। ऐसे में अब सिर्फ सरकार और मंत्रियों के परफॉर्मेंस के आधार पर ही अगला चुनाव लड़ना होगा। इसलिए सभी मंत्रियों को अभी से सचेत कर दिया गया है।
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भाजपा नेता और महराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा है कि पश्चिम बंगाल के लोगों ने डेवलपमेंट के लिए वोट दिया है। लोगों ने थर्ड डिग्री पॉलिटिक्स को खत्म कर दिया है। इसलिए महाराष्ट्र में भी हम सभी को इससे सबक लेने की जरूरत है। विपक्षी पार्टियों के नेताओं को भी इससे सबक लेना चाहिए। हालांकि, उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) नहीं सुधरी तो उन्हें 2047 तक घर पर बैठना होगा। महाराष्ट्र के लोग भी डेवलपमेंट के पक्ष में खड़े है। बावनकुले ने अपने सहयोगी दलों के मंत्रियों के साथ बैठक कर महायुति की आगामी योजनाओं पर मंथन किया।