Heatwave Preparedness: जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ते तापमान की चुनौतियों का सामना करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सह्याद्री अतिथि गृह से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आईआईएम (आईआईएम) नागपुर में 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर हीट रेजिलिएशन एंड सस्टेनेबल कूलिंग' का आधिकारिक उद्घाटन किया। यह केंद्र भविष्य में राज्य आपदा प्रबंधन संस्थान (एसआईडीएम) के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में कार्य करेगा, जिससे अति-उष्णता और लू (हिटवेव) जैसी समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान खोजा जा सके।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का सबसे गहरा प्रभाव कृषि क्षेत्र और विशेष रूप से अल्प-भूधारक किसानों पर पड़ रहा है। विदर्भ सहित राज्य के कई हिस्सों में बढ़ते तापमान के कारण स्कूलों को बंद करने तक की नौबत आ जाती है। बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और अब भीषण गर्मी ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की समस्याओं को जटिल बना दिया है। यह नया 'सेंटर फॉर एक्सीलेंस' इन संकटों से निपटने के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम करेगा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह संस्था प्राथमिकता के आधार पर 'हीट एक्शन प्लान' और 'शहरी जलवायु कार्य योजनाओं' की समीक्षा करेगी। इसके माध्यम से चयनित शहरों और जिलों को तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि केवल योजना बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके कार्यान्वयन के लिए स्वास्थ्य कर्मचारियों, अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। निर्माण क्षेत्र में भी पर्यावरण के अनुकूल सामग्री के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि बढ़ती गर्मी के बावजूद कूलिंग के लिए बिजली की खपत कम की जा सके।
सतत विकास (सस्टनेबल डेवलपमेंट) का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक 52% ऊर्जा और 2035 तक 65% ऊर्जा गैर-पारंपरिक स्रोतों से प्राप्त की जाए। इसके अतिरिक्त, किसानों के लिए 16,000 मेगावाट बिजली सौर ऊर्जा के माध्यम से उपलब्ध कराने का प्रयास निरंतर जारी है।
प्राकृतिक संसाधन रक्षा परिषद (एनआरडीसी) के अध्यक्ष मनीष बाफना ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि नागपुर का यह केंद्र न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक नीतियों को लागू करने वाली सक्षम संस्थाएं नहीं होंगी, तब तक प्रगति संभव नहीं है। आईआईएम नागपुर और एनआरडीसी के बीच हुआ यह समझौता पर्यावरण संरक्षण और कूलिंग तकनीक के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा।
महाराष्ट्र सरकार ने नागपुर के मिहान में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान की तर्ज पर राज्य स्तरीय संस्थान बनाने की मंजूरी दी है, जिसके लिए 184 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। इस परिसर में कुल आठ 'सेंटर फॉर एक्सीलेंस' होंगे, जिनमें से यह गर्मी प्रतिरोधी केंद्र सबसे प्रमुख होगा। फिलहाल यह केंद्र आईआईएम नागपुर के परिसर से संचालित होगा, जहां शोध, डेटा विश्लेषण और भविष्य की चुनौतियों से लड़ने की रणनीतियां तैयार की जाएंगी।