मुंबई: पुलिस की गुंडागर्दी! पैर से दबाया, फिर जड़े थप्पड़; ताड़देव पुलिस अधिकारी की करतूत पर मां ने उठाई आवाज

Tardeo Police News: ताड़देव एपीआई हितेश जोष्ठे पर नाबालिग को पीटने का आरोप। सीसीटीवी फुटेज के बावजूद 3 दिन से कोई कार्रवाई नहीं। मां ने एसीपी से की शिकायत।
Tardeo Minor beaten case
Tardeo Minor beaten case (प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स-AI)
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Tardeo Police Minor Beaten Case: मुंबई के पॉश ताड़देव इलाके से पुलिस प्रशासन को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। यहाँ ताड़देव पुलिस स्टेशन में तैनात एपीआई (API) हितेश जोष्ठे पर एक 15 वर्षीय नाबालिग बच्चे के साथ अमानवीय व्यवहार और मारपीट करने का गंभीर आरोप लगा है। घटना का वीडियो सीसीटीवी (CCTV) में कैद होने और पीड़ित परिवार द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत करने के तीन दिन बाद भी आरोपी अधिकारी के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे स्थानीय निवासियों में भारी रोष है।

पीड़ित बच्चे की मां के अनुसार, यह घटना 17 अप्रैल 2026 की शाम ताड़देव के तुलसीवाडी इलाके में घटी। आरोप है कि एपीआई जोष्ठे उस समय अपने कुछ साथियों के साथ सिविल ड्रेस (सादे कपड़ों) में गश्त पर थे। सामने से आ रहे नाबालिग को रोककर जब उन्होंने उसका नाम पूछा, तो बच्चे ने विनम्रता से जवाब दिया। लेकिन बिना किसी उकसावे के, जोष्ठे ने अपना पैर बच्चे के पैर के ऊपर रख दिया। जब बच्चे ने इसका विरोध किया, तो अधिकारी ने पैर हटाने के बजाय उसे और जोर से दबाना शुरू कर दिया।

साथियों ने पकड़ा, अधिकारी मारता रहा थप्पड़

शिकायत के मुताबिक, विरोध करने पर एपीआई जोष्ठे ने अपना आपा खो दिया और नाबालिग को सरेआम कई जोरदार थप्पड़ जड़ दिए। इस दौरान वहां मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप करने के बजाय बच्चे को पकड़कर रखा, ताकि जोष्ठे उसे और पीट सकें। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुँची मां ने जब बीच-बचाव किया, तब जाकर अधिकारी रुके। इसके तुरंत बाद परिवार ने ताड़देव डिवीजन के एसीपी (ACP) के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई, लेकिन उनका आरोप है कि विभाग अपने अधिकारी को बचाने की कोशिश कर रहा है।

पुराना रहा है मारपीट का रिकॉर्ड

नाबालिग की पिटाई मामले में मां ने यह भी चौंकाने वाला खुलासा किया कि एपीआई जोष्ठे की यह 'गुंडागर्दी' पहली बार नहीं है। उनका आरोप है कि पिछले साल भी इसी अधिकारी ने उनके दूसरे बेटे के साथ मारपीट की थी। इसके अलावा, कुछ साल पहले ताड़देव सिग्नल पर एक निर्दोष बाइक चालक को थप्पड़ मारने का मामला भी चर्चा में आया था। हर बार शिकायत के बावजूद जोष्ठे के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई नहीं की गई, जिससे उनके हौसले बुलंद हैं।

सिस्टम पर उठते सवाल

मुंबई पुलिस अपनी संवेदनशीलता के लिए जानी जाती है, लेकिन ताड़देव की इस घटना ने 'खाकी' की छवि पर दाग लगा दिया है। सीसीटीवी फुटेज जैसा पुख्ता सबूत होने के बाद भी प्राथमिकी (FIR) दर्ज न होना पुलिसिया कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है। स्थानीय सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, जो गृह विभाग भी संभाल रहे हैं, इस मामले में हस्तक्षेप करें और नाबालिग के साथ न्याय सुनिश्चित करें।

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