Maharashtra Health Department: महाराष्ट्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग में अब अधिकारियों की कार्यक्षमता और प्रदर्शन को 'काम करो और आगे बढ़ो' के आधार पर प्राथमिकता दी जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने जिला सिविल सर्जन और जिला स्वास्थ्य अधिकारियों के काम का वस्तुनिष्ठ वार्षिक मूल्यांकन करने की नई प्रणाली शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत अधिकारियों के पिछले तीन वर्षों के प्रदर्शन का 100 अंकों के आधार पर मूल्यांकन कर उन्हें ‘अ’, ‘ब’, ‘क’ और ‘ड’ चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा।
नई व्यवस्था में अधिकारियों की भविष्य की जिम्मेदारियां और पदस्थापन तय करते समय उनके प्रदर्शन की श्रेणी को महत्वपूर्ण आधार माना जाएगा। साथ ही, अगले तीन वर्षों के लिए अधिकारी ने क्या योजना बनाई है और अपेक्षित प्रदर्शन क्या रहेगा, इसका भी आगामी जिम्मेदारियां तय करते समय विचार किया जाएगा। इससे केवल वरिष्ठता के बजाय गुणवत्ता और वास्तविक कार्यक्षमता को अधिक महत्व मिलने की उम्मीद है।
31 मार्च 2026 तक कम से कम तीन वर्ष की सेवा पूरी कर चुके अधिकारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 की उपलब्धियों को आधार बनाया जाएगा। मूल्यांकन में मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, नेतृत्व क्षमता, शिकायत निवारण, आर्थिक अनुशासन, मानव संसाधन प्रबंधन और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है।
मूल्यांकन में आयुष्मान भारत कार्ड कवरेज, स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल पर समय पर जानकारी अपडेट करना, महाकर्मी पोर्टल, आयुष्मान भारत तथा महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा NHM, CSR फंड के उपयोग, अस्पतालों में दवा उपलब्धता, भोजन व्यवस्था, स्वच्छता और संविदा कर्मचारियों के प्रबंधन की भी समीक्षा होगी। प्राकृतिक आपदा, महामारी, बीमारी के प्रकोप और बड़े हादसों के दौरान अधिकारियों की कार्यवाही को भी अंक दिए जाएंगे।
स्वास्थ्य मंत्री आबिटकर ने कहा कि मूल्यांकन के लिए अधिकारी का जिला सर्जन या जिला स्वास्थ्य अधिकारी संवर्ग में होना और कम से कम तीन वर्ष की सेवा पूरी करना आवश्यक होगा। अधिकारी के खिलाफ लंबित या प्रस्तावित अनुशासनात्मक कार्रवाई, वित्तीय अनियमितता, गबन या गंभीर शिकायतें नहीं होनी चाहिए। ईमानदारी, अच्छा आचरण और स्वच्छ सेवा रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण मानदंड होंगे। स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, इस व्यवस्था का उद्देश्य कामकाज में पारदर्शिता, जवाबदेही और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ाना है। प्रधान सचिव डॉ. निपुण विनायक और स्वास्थ्य सेवा आयुक्त संजय काटकर इसके प्रशासनिक क्रियान्वयन का नेतृत्व करेंगे।