Maharashtra Government Guidelines: महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी कार्यालयों में जनप्रतिनिधियों के लिए लागू प्रोटोकॉल से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से 28 सितंबर को जारी संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार, आपराधिक या अन्य मामलों में दोषी ठहराए जा चुके जनप्रतिनिधियों के कार्यालय आने पर अधिकारियों के लिए विशेष प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य नहीं होगा। ऐसे जनप्रतिनिधियों के साथ सरकारी कार्यालयों में आम नागरिकों के अनुरूप व्यवहार किया जाएगा।
नए दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि कोई विधायक या सांसद किसी मामले में दोषी ठहराया जा चुका है और पूछताछ, सुनवाई या किसी अन्य प्रशासनिक कार्य के लिए सरकारी कार्यालय पहुंचता है, तो संबंधित अधिकारी का खड़े होकर उसका अभिवादन करना अनिवार्य नहीं होगा।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि जनप्रतिनिधि के साथ असम्मानजनक व्यवहार किया जाए। कार्यालय आने वाले अन्य जनप्रतिनिधियों की बात ध्यानपूर्वक सुनने और नियमानुसार आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
संशोधित व्यवस्था में सांसदों और विधायकों से प्राप्त पत्रों के लिए अलग रिकॉर्ड रखने का भी प्रावधान किया गया है। संबंधित अधिकारियों को इन पत्रों पर कार्रवाई करते हुए दो महीने के भीतर जवाब देना अनिवार्य होगा।
यदि किसी पत्र का निर्धारित अवधि में जवाब देना संभव नहीं होता है, तो संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को देरी का कारण बताना होगा। साथ ही, जनप्रतिनिधि को भी इसकी जानकारी देनी होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों की ओर से भेजे गए पत्रों पर प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करना बताया गया है।
महाराष्ट्र सरकार के संशोधित दिशानिर्देशों का उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में प्रशासनिक गरिमा बनाए रखने के साथ जनप्रतिनिधियों के सम्मान और उनके अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करना है। नए नियमों के तहत अधिकारियों के लिए यह स्पष्ट किया गया है कि दोषी ठहराए गए जनप्रतिनिधियों को सामान्य नागरिकों से अलग विशेष अभिवादन या प्रोटोकॉल देना अनिवार्य नहीं है।
वहीं, सांसदों और विधायकों के पत्रों पर समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश प्रशासनिक प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ाने से जुड़े हैं।