महाराष्ट्र सरकार ने एमसीजेडएमए की ग्रांट बंद की।
तीन साल में ₹25 करोड़ से कम खर्च वाली योजनाओं पर कार्रवाई।
सीआरजेड कार्य अब प्राधिकरण अपने शुल्क से करेगा।
Maharashtra Government Decision: महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी खजाने पर गैर-जरूरी वित्तीय बोझ घटाने के लिए अनुपयोगी योजनाओं पर कैंची चलाते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत पिछले तीन वित्तीय वर्षों में 25 करोड़ रुपए से कम खर्च वाली योजनाओं को बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसी नीति के तहत महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण (एमसीजेडएमए) की ग्रांट भी रोक दी गई है। सरकारी आर्थिक सहायता बंद होने के बाद अब प्राधिकरण अपने संसाधनों से ही काम चलाएगा।
पर्यावरण विभाग के अनुसार, प्राधिकरण के बैंक खाते में आवेदनों की जांच से पर्याप्त शुल्क राशि जमा है। इसी राशि से कोस्टल रेगुलेशन जोन (सीआरजेड) नक्शों की तैयारी और तटीय प्रबंधन से जुड़े सभी जरूरी काम बिना किसी सरकारी मदद के पूरे किए जाएंगे।
महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण की स्थापना पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत केंद्र सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के तटीय क्षेत्रों का पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन करना है।
यह प्राधिकरण तटीय इलाकों में पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने, उनके प्रबंधन की योजनाएं तैयार करने, मैंग्रोव के संरक्षण और तटीय पर्यावरण के प्रबंधन से जुड़े कार्यों में तालमेल बिठाने की जिम्मेदारी निभाता है।
प्राधिकरण की जिम्मेदारियों को देखते हुए 23 जून 2009 को सिंधुदुर्ग में हुई मंत्रिमंडल की बैठक मे कोंकण विशेष पैकेज के तहत इसे वित्तीय सहायता देने की मंजूरी दी गई थी। इसके बाद, 22 मार्च 2010 को जारी जीआर (शासन निर्णय) के माध्यम से सहायता अनुदान योजना के तहत प्राधिकरण को निधि उपलब्ध कराने की स्वीकृति दी गई। इस व्यवस्था का उद्देश्य तटीय क्षेत्रों के संरक्षण, मैग्रोव प्रबंधन और पर्यावरण से जुड़े कार्यों को गति देने के लिए प्राधिकरण को आर्थिक मदद देना था।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 30 जनवरी 2026 को हुई बैठक में राज्य की उन योजनाओं की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए थे, जिन पर पिछले तीन वित्तीय वर्षों में वास्तविक खर्च 25 करोड़ रुपए से कम रहा है।
इस संबंध में वित्त विभाग ने 4 फरवरी 2026 के पत्र के जरिए संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा था। इसी समीक्षा के दौरान महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण का खर्च 25 करोड़ रुपए से कम पाया गया, जिसके बाद सरकार ने इस योजना को बंद करने का निर्णय लिया।
₹ प्राधिकरण को पर्यावरण पोर्टल के माध्यम से तटीय विनियमन क्षेत्र यानी सीआरजेड से जुड़ी अनुमति के प्रस्ताव मिलते हैं। इन प्रस्तावों की जांच के लिए निर्धारित शुल्क लिया जाता है, जो सीधे प्राधिकरण के बैंक खाते में जमा होता है।
महाराष्ट्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में सीआरजेड मानचित्रों की जरूरतों पर होने वाला खर्च इसी खाते में जमा राशि से पूरा किया जाएगा। जीआर में यह भी कहा गया है कि फिलहाल इस संबंध में कार्यालय पर कोई वित्तीय देनदारी लंबित नहीं है।