महाराष्ट्र कोचिंग क्लासेस रेगुलेशन (सोर्सः सोशल मीडिया)
मुंबई

कोचिंग क्लासेस पर रेगुलेशन को लेकर उठे सवाल ! क्लास ऑनर्स एसोसिएशन ने कई मुद्दों पर जताई आपत्ति

Coaching Classes New Rules: महाराष्ट्र में कोचिंग क्लासेस के प्रस्तावित रेगुलेशन पर क्लास ऑनर्स एसोसिएशन ने 13 साल से कम उम्र, समय सीमा, पार्किंग, जुर्माने और अन्य प्रावधानों पर आपत्ति जताई।

सूर्यप्रकाश मिश्र, आंचल लोखंडे

Maharashtra Coaching Classes Regulation: राज्य भर में कोचिंग क्लासेस को लेकर प्रस्तावित कड़े रेगुलेशन पर महाराष्ट्र क्लास ऑनर्स एसोसिएशन ने कई प्रावधानों को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है।

एसोसिएशन का कहना है कि वह नियमन के खिलाफ नहीं है और पारदर्शी एवं सुरक्षित व्यवस्था के लिए सरकार के साथ सहयोग करने को तैयार है, लेकिन नियम बनाते समय कोचिंग संस्थानों की व्यावहारिक कठिनाइयों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

तो 40 प्रतिशत क्लासेस बंद

एसोसिएशन के अनुसार, 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कोचिंग की अनुमति नहीं देने का प्रावधान लागू होने पर बड़ी संख्या में कक्षाएं प्रभावित हो सकती हैं। महाराष्ट्र क्लास ऑनर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सचिन कर्नावट ने कहा कि रेगुलेशन में प्रस्तावित नियमों से 40 प्रतिशत से ज्यादा क्लासेस बंद हो सकते हैं। छोटे बच्चों के लिए अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता, ओलंपियाड और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी इससे प्रभावित होने की संभावना है।

इसी तरह दिन में अधिकतम पांच घंटे कोचिंग की सीमा को भी एसोसिएशन ने अव्यावहारिक बताया है। IIT, NEET, CA जैसी प्रतियोगी और व्यावसायिक परीक्षाओं की तैयारी में कई बार सिलेबस पूरा करने, रिवीजन और अतिरिक्त अभ्यास के लिए अधिक समय की आवश्यकता होती है।

पार्किंग व जगह अनिवार्यता पर सवाल

प्रति विद्यार्थी एक वर्ग मीटर जगह अनिवार्य किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सचिन कर्नावट ने कहा कि मुंबई,ठाणे व अन्य महंगे शहर में इतना बड़ा स्थान उपलब्ध कराना छोटे और मध्यम संस्थानों के लिए मुश्किल होगा। वहीं, विद्यार्थियों के लिए पार्किंग सुविधा अनिवार्य करने को भी व्यावहारिक नहीं बताया गया है, क्योंकि बड़ी संख्या में विद्यार्थी रेलवे और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करते हैं।

फायर सेफ्टी को जरूरी बताते हुए एसोसिएशन ने मांग की है कि सुरक्षा मानकों को स्पष्ट और समान रूप से लागू किया जाए। सप्ताह में अनिवार्य छुट्टी के प्रावधान में भी लचीलापन रखने की मांग की गई है, क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान कभी-कभी अतिरिक्त कक्षाओं की जरूरत पड़ती है।

जुर्माने को लेकर भी आपत्ति

एसोसिएशन ने निरीक्षण, तलाशी और संस्थान को अंतरिम रूप से बंद या सील करने की शक्तियों को लेकर भी चिंता जताई है। उसका कहना है कि इन प्रावधानों के दुरुपयोग की आशंका को देखते हुए स्पष्ट प्रक्रिया और सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।

इसके अलावा ₹10 लाख से ₹50 लाख तक के जुर्माने को छोटे और मध्यम कोचिंग संस्थानों के लिए अत्यधिक कठोर बताया गया है। वहीं, 10 वर्षों तक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की अनिवार्यता को भी बड़ा प्रशासनिक बोझ बताया गया है।

कठोर शर्ते लागू करने का विरोध

एसोसिएशन का कहना है कि कोचिंग संस्थान रोजगार पैदा करते हैं, कर और GST का भुगतान करते हैं तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में विद्यार्थियों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग देते हैं। कुछ संस्थानों की गलतियों के कारण पूरी इंडस्ट्री पर कठोर शर्तें लागू करना उचित नहीं होगा। एसोसिएशन ने सरकार से अपील की है कि वह क्लास ऑनर्स के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाए और सभी पक्षों के साथ मिलकर व्यावहारिक समाधान निकाले।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों का स्पष्ट कहना है।“हम रेगुलेट होने को तैयार हैं, लेकिन हमें वैध और जिम्मेदार तरीके से अपना व्यवसाय करने का अवसर भी दिया जाए।” 3 अक्टूबर को एसोसिएशन द्वारा मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में भी उक्त मुद्दों पर विस्तार से चर्चा किए जाने की जानकारी दी गई है।

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