Maharashtra Cabinet Unhealthy Food Ban Mantralaya Canteen: महाराष्ट्र में खाद्य पदार्थों में मिलावट और अस्वास्थ्यकर खाद्य कारोबार के खिलाफ अन्न व औषधि प्रशासन (FDA) आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में चलाए जा रहे अभियान का असर अब मंत्रालय तक पहुंच गया है। जनता के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने सरकारी बैठकों और मंत्रालय की कैंटीन में परोसे जाने वाले अनहेल्दी खाद्य पदार्थों को लेकर बड़ा फैसला लिया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक में समोसा, पकौड़ा और फास्ट फूड सहित अत्यधिक तेल और मसाले वाले खाद्य पदार्थों पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया। कैबिनेट बैठक में लिया गया यह फैसला दिनभर चर्चा में रहा।
सरकार के फैसले के अनुसार मंत्रालय की कैंटीन और शासकीय बैठकों में ऐसे खाद्य पदार्थों को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा, जिन्हें स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक माना जाता है। इनमें अधिक तेल और मसाले में तैयार होने वाले समोसा, पकौड़ा और विभिन्न प्रकार के फास्ट फूड शामिल हैं।
सरकार का यह कदम सरकारी कार्यालयों में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच स्वस्थ खान-पान को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही सरकारी बैठकों में परोसे जाने वाले खाद्य पदार्थों को लेकर भी स्वास्थ्य संबंधी मानकों पर जोर दिया जाएगा।
FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे के निर्देश पर राज्यभर में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मिलावट को लेकर कार्रवाई तेज की गई है। असुरक्षित तरीके से खाद्य पदार्थ तैयार करने और खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों के खिलाफ लाइसेंस निलंबन और अन्य कार्रवाई की जा रही है।
मिलावट और अस्वच्छ खाद्य पदार्थों के खिलाफ चल रहे इस अभियान को जनता का समर्थन भी मिल रहा है। इसी बीच मंत्रालय जैसे राज्य प्रशासन के प्रमुख केंद्र में भी स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए अनहेल्दी खाद्य पदार्थों पर रोक का फैसला चर्चा में आ गया है।
कैबिनेट के इस फैसले को केवल मंत्रालय की कैंटीन तक सीमित कार्रवाई के बजाय सरकारी स्तर पर स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अत्यधिक तेल, मसाले और तले हुए खाद्य पदार्थों की जगह पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक विकल्पों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया जा सकता है।
सरकार के इस फैसले के बाद मंत्रालय की कैंटीन में खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और सरकारी बैठकों में परोसे जाने वाले भोजन के स्वरूप में बदलाव देखने को मिल सकता है।