Jayant Patil Assembly Speech MLA Wife Threat Case: महाराष्ट्र विधानमंडल के मानसून सत्र के दौरान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के वरिष्ठ नेता और प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने राज्य की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक ढिलाई को लेकर महायुति सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। सदन में दूध में मिलावट के मुद्दे पर चल रही चर्चा के बीच जयंत पाटिल ने अचानक एक बेहद गुप्त और सनसनीखेज वाकये का जिक्र कर पूरे सदन को हैरान कर दिया।
पाटिल ने दावा किया कि राज्य में हाल ही में भारी मात्रा में बेनामी नकदी बरामद हुई है, जिसके तार सत्ताधारी दल के एक विधायक से जुड़े हैं। इस मामले को दबाने के लिए उस विधायक की पत्नी ने एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र के संपादक को फोन करके सीधे तौर पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। जयंत पाटिल ने मुख्यमंत्री से मांग की कि इस पूरे कॉल रिकॉर्ड की गहन जांच होनी चाहिए और अगले सत्र के पहले ही दिन सरकार उस विधायक और उसकी पत्नी के नाम का आधिकारिक खुलासा करे।
जयंत पाटिल ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाते हुए कहा कि इस पूरे मानसून सत्र में मंत्रियों और अधिकारियों की उदासीनता साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा, "सत्र चल रहा है लेकिन जिम्मेदार मंत्री और अधिकारी हॉल से नदारद हैं। राज्य में विकास पूरी तरह बर्बाद हो चुका है और कानून का इकबाल खत्म हो गया है।" पाटिल ने एक पार्षद द्वारा चिकित्सा कर्मचारियों की सरेआम पिटाई की घटना का हवाला देते हुए सरकार को पूरी तरह घेरा।
अपने खुद के निर्वाचन क्षेत्र का उदाहरण देते हुए पाटिल ने गृह मंत्रालय संभाल रहे मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने बताया, "मेरे क्षेत्र में दिनदहाड़े एक व्यक्ति की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी गई, लेकिन स्थानीय पुलिस ने राजनीतिक दबाव के कारण मामला तक दर्ज नहीं किया। मुझे पता चला है कि सत्ता पक्ष के ही एक विधायक ने पुलिस को फोन करके FIR दर्ज करने से रोका था। पुलिस के कॉल रिकॉर्ड खंगालिए, सच सामने आ जाएगा। जिस तरह सरेआम अपराध हो रहे हैं और अपराधियों को संरक्षण मिल रहा है, उसे देखकर लगता है कि क्या महाराष्ट्र अब बिहार बन गया है?"
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सदन में विपक्षी नेताओं के सुरों को और धार देते हुए जयंत पाटिल ने ठाणे के चर्चित जमील शेख हत्याकांड का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सरकार को याद दिलाया कि इस हाई-प्रोफाइल हत्या की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष जांच अधिकारी नियुक्त करने का वादा किया गया था, लेकिन नतीजा अब तक शून्य रहा है। पाटिल ने पुलिस और अपराधियों के बीच चल रहे करोड़ों रुपये के कथित नेक्सस का भी पर्दाफाश किया।
उन्होंने नागपुर और राज्य के अन्य हिस्सों का जिक्र करते हुए कहा, "जब हम नागपुर में बढ़ते अपराधों पर बात करते हैं, तो सत्ता पक्ष के लोग चिल्लाने लगते हैं कि हम नागपुर को बदनाम कर रहे हैं। लेकिन हकीकत यह है कि वहां की पुलिस करोड़ों रुपये का अवैध समझौता करने के बाद बड़े-बड़े सट्टेबाजों को आसानी से छोड़ देती है। महज 500 रुपये के जुर्माने की हेराफेरी पर 9 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड करने का दिखावा किया गया, जबकि करोड़ों की वसूली पर आंखें मूंद ली गईं। मैंने खुद जुआ खेलते हुए लोगों की तस्वीरें पुलिस को भेजीं, लेकिन कार्रवाई करने के बजाय पुलिस वहां जबरन वसूली करने पहुंच गई।"
जयंत पाटिल ने अपने आक्रामक भाषण के अंत में राज्य के आबकारी मंत्री शंभूराजे देसाई पर तीखा तंज कसा। पाटिल ने सतारा की एक पुरानी घटना को याद दिलाते हुए कहा कि किस तरह शंभूराजे को पुलिस जबरन उठाकर एक तरफ ले गई थी, लेकिन आज सत्ता और कुर्सी की मजबूरी के कारण उन्हें सिर झुकाकर बैठना पड़ रहा है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि जब देसाई के हाथ में चोट लगी थी तब वे बड़े आक्रामक थे, लेकिन अब सत्ता की 'ऑक्सीजन' मिलने के बाद ही उनकी सांसें लौट आई हैं और उनकी आवाज बेहद धीमी हो गई है।
इसके साथ ही उन्होंने सरकार से पूछा कि अजीत पवार से जुड़े पुराने हादसों और मामलों की जांच रिपोर्ट आखिर कहां गायब है? सरकार ने पूर्व में अजीत पवार के नाम पर एक बड़ा स्मारक बनाने का वादा किया था, लेकिन आज उनके साथ क्या राजनीति हो रही है, इसका कोई अता-पता नहीं है। पाटिल ने साफ किया कि राज्य की जनता का पुलिस और गृह विभाग से भरोसा पूरी तरह उठ चुका है, क्योंकि हर तरफ केवल और केवल हफ्ता वसूली का धंधा फल-फूल रहा है।