मुंबई

मिलावटखोरों को मिलेगी मौत की सजा? विधानसभा में गूंजा मुद्दा, मंत्री नरहरी झिरवाल ने दिया जवाब

Maharashtra Assembly Adulteration Law Death Penalty: महाराष्ट्र विधानसभा में मिलावटखोरों को मृत्युदंड देने की मांग पर मंत्री नरहरी झिरवाल ने कानून स्पष्ट किया।

अनिल सिंह

Narhari Zirwal On Milk Adulteration: महाराष्ट्र विधानमंडल के मानसून सत्र में मिलावटखोरी के कारण आम जनता के स्वास्थ्य पर मंडरा रहे गंभीर खतरे का मुद्दा बेहद आक्रामक रूप से गूंजा। विधानसभा में सत्ताधारी और विपक्षी दलों के विधायकों ने आम आदमी की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले अपराधियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग उठाई। विधायक प्रकाश सोलंके ने सदन में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए मिलावट करने वालों के लिए आजीवन कारावास या सीधे मृत्युदंड का प्रावधान करने पर सरकार का रुख स्पष्ट करने को कहा।

इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) राज्य मंत्री नरहरी झिरवाल ने एक बेहद महत्वपूर्ण और विस्तृत बयान दिया। मंत्री झिरवाल ने सदन को आश्वस्त किया कि मौजूदा कानून के तहत मिलावट के गंभीर मामलों में दोषियों को एक लाख रुपये के जुर्माने से लेकर मृत्युदंड तक की कड़ी सजा देने का स्पष्ट प्रावधान पहले से ही मौजूद है और सरकार अपराधियों को कतई नहीं बख्शेगी।

आईएएस तुकाराम मुंडे की कार्रवाई से मचा हड़कंप

सदन में चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि जब से बेहद कड़क छवि वाले आईएएस (IAS) अधिकारी तुकाराम मुंडे ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग का कार्यभार संभाला है, तब से राज्य भर के मिलावटखोरों के खिलाफ एक व्यापक और ताबड़तोड़ अभियान चलाया जा रहा है। पश्चिमी महाराष्ट्र से लेकर विदर्भ तक दूध डेयरियों और उत्पादकों पर की गई छापेमारी में एक भयावह सच सामने आया है।

रासायनिक तत्वों और रसायनों की मदद से महज 5 रुपये प्रति लीटर की लागत में तैयार होने वाला जहरीला कृत्रिम दूध बाजार में आम जनता को 70 से 90 रुपये प्रति लीटर के ऊंचे भाव पर बेचा जा रहा था। इस खतरनाक रैकेट पर हुई कड़ी कार्रवाई का असर यह हुआ कि राज्य में अचानक दूध के कुल उत्पादन और आपूर्ति की मात्रा में 25 प्रतिशत की भारी कमी आ गई है। इस आंकड़े ने पूरे सदन को चौंका दिया, क्योंकि यह साबित करता है कि बाजार में बिकने वाले कुल दूध का एक चौथाई हिस्सा पूरी तरह से नकली और मिलावटी था।

गोपीचंद पाडलकर ने उठाए बड़े सवाल

दूध में मिलावट के इस भयावह नेटवर्क को लेकर सत्ताधारी दल के ही कई सदस्यों ने अपनी ही सरकार के खिलाफ तीखा आक्रोश व्यक्त किया। बीजेपी विधायक गोपीचंद पाडलकर ने इस धंधे में शामिल बड़े सिंडिकेट पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी भी दूध संघ के खिलाफ महज औपचारिकता के लिए कार्रवाई करने से पहले इसकी पूरी ऑडिट होनी चाहिए कि कितना दूध भीतर आ रहा है और कितना बाहर जा रहा है।

पाडलकर ने बेहद आक्रामक अंदाज में पूछा कि जब कार्रवाई के बाद दूध की मात्रा 25 प्रतिशत कम हो गई है, तो सरकार उन दागी दूध संघों के मालिकों के खिलाफ सीधे तौर पर आपराधिक मुकदमे दर्ज करने की कार्रवाई कब शुरू करेगी?उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे धंधे के पीछे विभाग के कई भ्रष्ट अधिकारी और सफेदपोश लोग शामिल हैं, जिन पर सबसे पहले शिकंजा कसा जाना चाहिए। इस पर जवाब देते हुए मंत्री झिरवाल ने साफ किया कि मिलावट की पुष्टि होने पर संबंधित संस्थाओं के खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है।

तुकाराम मुंडे का 3 साल तक न हो तबादला

सदन में मिलावटखोरी के खिलाफ चल रही इस जंग को तार्किक अंजाम तक पहुंचाने के लिए विधायकों ने एक सुर में ईमानदार अधिकारियों को संरक्षण देने की मांग की। विधायक किशोर पाटिल ने एक बेहद अहम मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रतिभाशाली और कड़क आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे का बार-बार तबादला कर दिया जाता है, जिससे कार्रवाई ठप हो जाती है।

उन्होंने मांग की कि इस विभाग की शुद्धि के लिए मुंडे को कम से कम 3 साल तक इसी पद पर बनाए रखा जाए। वहीं, विधायक विकास ठाकरे ने सदन को एक बेहद असहज करने वाली जानकारी दी कि विधायक अमित जनक जब पार्टी कार्यालय में भोजन कर रहे थे, तो उनके खाने में एक मक्खी मिली, जो यह दर्शाती है कि होटलों और कैंटीन में स्वच्छता का क्या स्तर है।

वरिष्ठ नेता सुधीर मुनगंटीवार ने भी इस मुद्दे पर बेहद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यह जनता के स्वास्थ्य और सीधे मौत से जुड़ा मामला है। मुनगंटीवार ने मांग की कि इस विषय की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री को तुरंत एक विशेष मंत्रिमंडल की बैठक बुलानी चाहिए, क्योंकि उन्होंने पहले भी यह मुद्दा उठाया था लेकिन जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम नहीं दिखे थे।

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