Credit Recovery Task Forces In Maharashtra: आर्थिक गड़बड़ियों के कारण मुश्किल में आईं राज्य की 469 नागरी और ग्रामीण गैर-कृषि सहकारी पतसंस्थाओं से बकाया कर्ज और आर्थिक नुकसान की वसूली अब तेज होगी।
दोषी संचालकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, कर्जदारों और जमानतदारों की संपत्तियां जब्त कर उनकी बिक्री की प्रक्रिया आसान बनाने के लिए तालुकास्तरीय समितियां गठित की जाएंगी।
सहकार विभाग ने आर्थिक संकट से जूझ रही 469 नागरी और ग्रामीण गैर-कृषि सहकारी पतसंस्थाओं से जुड़ी वसूली प्रक्रिया को गति देने के लिए शासन निर्णय जारी किया है। इसके तहत तालुकास्तर पर विशेष समितियां गठित की जाएंगी, जिनकी अध्यक्षता उपविभागीय अधिकारी करेंगे।
इन समितियों के माध्यम से संस्थाओं से संबंधित बकाया रकम और संपत्तियों की कार्रवाई पर नजर रखी जाएगी। विभाग ने आर्थिक अनियमितताओं के चलते इन 469 संस्थाओं पर विभिन्न प्रतिबंध लगाए हैं। कई पतसंस्थाएं आर्थिक संकट के कारण अपने जमाकर्ताओं को तय समय पर जमा राशि वापस नहीं कर सकीं। नई व्यवस्था से वसूली और संबंधित कार्रवाई में तेजी आने की उम्मीद है।
महाराष्ट्र राज्य सहकारी संस्था अधिनियम, 1960 की धारा 88 के तहत की गई जांच में करीब 1,949 संचालकों, अधिकारियों और कर्मचारियों को संस्थाओं को हुए आर्थिक नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। जांच के बाद कई मामलों में संबंधित लोगों की संपत्तियां जब्त भी की जा चुकी हैं।
हालांकि, इन संपत्तियों की नीलामी और बिक्री की प्रक्रिया में विभिन्न स्तरों पर अड़चनें सामने आ रही थीं। इसी वजह से तालुकास्तर पर समितियां गठित करने का निर्णय लिया गया है। ये समितियां जब्त संपत्तियों की नीलामी से जुड़ी समस्याओं को दूर करने, संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाने और वसूली प्रक्रिया को गति देने का काम करेंगी।
समितियां वसूली प्रमाण पत्रों की कार्रवाई की समीक्षा करेंगी। सात-बारा, 8-अ और अन्य संपत्ति अभिलेख तुरंत उपलब्ध कराए जाएंगे। दोषी लोगों की चल और अचल संपत्तियों की जानकारी जुटाकर उन पर संस्था का बकाया दर्ज किया जाएगा। जब्त संपत्तियां विशेष वसूली अधिकारियों को सौंपने में भी समितियां सहयोग करेंगी। कार्रवाई पूरी होने तक समितियां कार्यरत रहेंगी।