Kirit Somaiya (फोटो क्रेडिट-X) 
मुंबई

Kirit Somaiya की कमिश्नर को चिट्ठी: 'मस्जिद के पास हिंदू शोभायात्रा रोकने का नियम खत्म हो'

Kirit Somaiya Mumbai Police: BJP नेता किरीट सोमैया ने मुंबई पुलिस को पत्र लिख मस्जिदों के पास हिंदू शोभायात्रा रोकने की प्रथा खत्म करने की मांग की। रामनवमी विवाद पर सियासी घमासान।

अनिल सिंह

Kirit Somaiya Letter Mumbai Police Commissioner: मुंबई में रामनवमी की शोभायात्राओं के दौरान मस्जिदों के सामने यात्रा रोकने और लाउडस्पीकर बंद करने के नियमों को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती को एक पत्र लिखकर इस 'प्रथा' को तुरंत समाप्त करने की मांग की है। सोमैया का आरोप है कि पुलिस प्रशासन 'मानक संचालन प्रक्रिया' (SOP) के नाम पर हिंदू त्योहारों और शोभायात्राओं पर अनुचित पाबंदियां लगा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुँच रही है।

सोमैया ने अपने पत्र में दावा किया कि मुंबई और महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में पिछले कुछ वर्षों से एक अलिखित नियम लागू किया जा रहा है, जिसके तहत मस्जिदों के पास पहुँचने पर शोभायात्राओं को शांत रहने या रास्ता बदलने के लिए मजबूर किया जाता है।

घाटकोपर और पवई में शोभायात्रा पर पाबंदियां

किरीट सोमैया ने अपने आरोपों की पुष्टि के लिए हाल ही में संपन्न हुई रामनवमी (26 मार्च 2026) की शोभायात्राओं का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि घाटकोपर, पवई और चेंबूर जैसे इलाकों में पुलिस ने यात्रा के मार्ग और समय को लेकर कई तरह की पाबंदियां लगाई थीं। सोमैया के अनुसार, घाटकोपर में रामनवमी की शोभायात्रा को लगभग 45 मिनट तक सिर्फ इसलिए रोका गया क्योंकि पास की मस्जिद में नमाज का समय हो रहा था। उन्होंने सवाल उठाया कि सार्वजनिक सड़कों पर किसी एक समुदाय की प्रार्थना के नाम पर दूसरे समुदाय के धार्मिक उल्लास को रोकना कहाँ तक तर्कसंगत है?

पुलिस की SOP और लाउडस्पीकर विवाद

पूर्व सांसद का आरोप है कि पुलिस अधिकारी आयोजकों पर दबाव बनाते हैं और उन्हें मस्जिद से 200-300 मीटर पहले ही संगीत और लाउडस्पीकर बंद करने के निर्देश देते हैं। सोमैया ने पुलिस कमिश्नर से मांग की है कि ऐसी किसी भी SOP को सार्वजनिक किया जाए या उसे तुरंत बदला जाए जो केवल एक पक्ष पर लागू होती है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज अपनी परंपराओं के अनुसार त्योहार मनाने का हकदार है और पुलिस को सुरक्षा देने के बजाय 'मौन' रहने का आदेश नहीं देना चाहिए। इस मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर तीखी बहस छिड़ गई है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और सुरक्षा व्यवस्था

इस विवाद के बाद मुंबई में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। जहाँ भाजपा नेता इसे 'तुष्टिकरण की राजनीति' बता रहे हैं, वहीं विपक्षी दलों और पुलिस प्रशासन का तर्क है कि ये कदम सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए उठाए जाते हैं। मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील इलाकों में शांति बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। हालांकि, सोमैया के पत्र के बाद अब पुलिस विभाग पर नियमों की समीक्षा करने का दबाव बढ़ गया है, विशेष रूप से आगामी त्योहारों को देखते हुए।

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