Devendra Fadnavis On Maharashtra Trade Investment: भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक ट्रेड एग्रीमेंट आधिकारिक तौर पर लागू हो गया है। इसके साथ ही महाराष्ट्र के लिए ग्लोबल ट्रेड, फॉरेन इन्वेस्टमेंट और एक्सपोर्ट के नए और सुनहरे अवसर खुल गए हैं। मुंबई में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भरोसा जताया कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में महाराष्ट्र की अहम भूमिका होगी और राज्य जल्द ही 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी का लक्ष्य हासिल करेगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि यह समझौता सिर्फ टैरिफ में छूट देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा आर्थिक बदलाव है। इससे पुणे, नासिक, कोल्हापुर और छत्रपति संभाजीनगर जैसे शहरों के स्थानीय उद्योगों और कृषि उत्पादों को सीधे यूके और यूरोपीय बाजारों तक सीधी पहुंच मिलेगी। नासिक के अंगूर, कोंकण के अलफांसो आम, अनार, प्रोसेस्ड फूड और सी-फूड जैसे उत्पादों को अब यूके के विशाल कंज्यूमर मार्केट में बेहतर और वाजिब दाम मिल सकेंगे।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि भारत ने 1991 के आर्थिक सुधारों से लेकर 'मेक इन इंडिया' जैसी नीतियों तक कई बड़े बदलाव वाले पड़ाव हासिल किए हैं। उन्होंने बताया कि भारत और यूके के बीच मौजूदा व्यापार का वॉल्यूम 56 अरब डॉलर है और 2030 तक इसे दोगुना करने का लक्ष्य है। यह समझौता भारत के ज्यादातर एक्सपोर्ट को ड्यूटी-फ्री एक्सेस देगा और सर्विस सेक्टर, प्रोफेशनल मोबिलिटी, इन्वेस्टमेंट और इनोवेशन को बड़ी बढ़त देगा।
CM फडणवीस ने टैरिफ में हर कटौती MSME के लिए ग्लोबल एक्सपोर्टर बनने का, किसान के लिए बेहतर दाम पाने का, इंजीनियर के लिए ग्लोबल मार्केट के लिए प्रोडक्ट बनाने का और युवा उद्यमी के लिए वर्ल्ड-क्लास कंपनी बनाने का मौका देती है।
महाराष्ट्र की खूबियों पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि राज्य देश के कुल फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) का 39 प्रतिशत हिस्सा आकर्षित करता है। महाराष्ट्र फाइनेंस, इंडस्ट्री, स्टार्टअप, डेटा सेंटर, IT, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोटिव इंडस्ट्री और एग्रीकल्चरल एक्सपोर्ट जैसे कई सेक्टर में देश में सबसे आगे है। उन्होंने कहा कि अटल सेतु, समृद्धि महामार्ग, नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट, वधावन पोर्ट, 'थर्ड मुंबई' और इंटरनेशनल एडु-सिटी और मेडी-सिटी जैसे प्रोजेक्ट राज्य की ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस (वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता) को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं।
भारत-UK समझौते से महाराष्ट्र के इंजीनियरिंग सेक्टर, ऑटोमोटिव और ऑटो-कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों, साथ ही फार्मास्युटिकल और केमिकल इंडस्ट्रीज के लिए बड़े मौके बनेंगे। इससे इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, फिनटेक, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs), शिक्षण संस्थानों और क्रिएटिव इंडस्ट्रीज में सहयोग के नए रास्ते भी खुलेंगे।
इसके अलावा महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र को भी बहुत फायदा होगा। नासिक के अंगूर, कोंकण के अल्फोंसो आम, अनार, प्रोसेस्ड फ़ूड और समुद्री उत्पादों जैसे सामानों को UK जैसे बड़े कंज्यूमर मार्केट में बेहतर दाम मिलेंगे।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उद्यमियों से बड़ी सोच रखने, ग्लोबल मार्केट पर ध्यान देने और यूनाइटेड किंगडम को इनोवेशन, मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और सर्विस के क्षेत्र में एक रणनीतिक साझेदार के तौर पर देखने का आग्रह किया। कार्यक्रम के दौरान, भारत से यूके को निर्यात होने वाले भारतीय सामान और यूके से भारत में आयात होने वाले यूके के सामान को दिखाने वाले सांकेतिक कार्गो बॉक्स का अनावरण किया गया। यह भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार में हुई बढ़ोतरी का एक सांकेतिक प्रदर्शन था।
ब्रिटिश डिप्टी हाई कमिश्नर हरजिंदर कांग ने कहा कि भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement) के लागू होने से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को काफी बढ़ावा मिलेगा। यह देखते हुए कि महाराष्ट्र देश का एक प्रमुख औद्योगिक और आर्थिक केंद्र है, उन्होंने स्थानीय उद्योगों से इस समझौते से मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया।
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इस समझौते के तहत भारत से यूके को निर्यात होने वाले 99 प्रतिशत सामान और यूके से भारत में आयात होने वाले 90 प्रतिशत सामान पर टैरिफ कम हो जाएगा या खत्म हो जाएगा। उन्होंने भरोसा जताया कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापार में काफी बढ़ोतरी होगी और दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं मजबूत होंगी।
भारत-यूके कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक ट्रेड एग्रीमेंट के लागू होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में मेडिकल एजुकेशन मिनिस्टर हसन मुश्रीफ, स्किल डेवलपमेंट मिनिस्टर मंगलप्रभात लोढ़ा, मार्केटिंग और प्रोटोकॉल मिनिस्टर जयकुमार रावल और केंद्रीय वाणिज्य विभाग के स्पेशल सेक्रेटरी सुचिंद्र मिश्रा के साथ-साथ राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, उद्यमी, निर्यातक और अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।