NTA Controversy: प्रमुख वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक समूह ने सरकार से E20 ईंधन नीति पर रोक लगाने, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को समाप्त करने और देशभर में जादू-टोना तथा अंधविश्वास विरोधी सख्त कानून बनाने की मांग की है।
मुंबई में आयोजित ‘इंडिया मार्च फॉर साइंस’ के दौरान जारी संयुक्त अपील में कहा गया कि देश की सार्वजनिक नीतियां वैज्ञानिक प्रमाणों, तर्कसंगत सोच और उपलब्ध वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए।
इस अपील पर कई प्रमुख वैज्ञानिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हस्ताक्षर किए हैं। समूह ने छद्म विज्ञान को बढ़ावा दिए जाने, वैज्ञानिक प्रमाणों की अनदेखी करने वाली नीतियों और शिक्षा एवं अनुसंधान में सार्वजनिक निवेश में कमी पर भी चिंता जताई।
वैज्ञानिकों ने E20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित ईंधन नीति को लेकर पर्यावरण और संसाधनों से जुड़े सवाल उठाए। उनका कहना है कि E20 इथेनॉल मिश्रित ईंधन के पर्यावरणीय प्रभावों का व्यापक जीवन-चक्र आकलन नहीं किया गया है। इसके अलावा, इस नीति को लागू करने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा भी पर्याप्त नहीं होने की बात कही गई।
समूह ने आशंका जताई कि जैव ईंधन के लिए अधिक पानी की जरूरत वाली खाद्य फसलों का इस्तेमाल बढ़ने से खाद्य सुरक्षा और भूजल संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है।
परीक्षा व्यवस्था को लेकर भी वैज्ञानिकों ने सरकार से बड़ा बदलाव करने की अपील की। संयुक्त बयान में प्रश्नपत्र लीक और राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े विवादों का हवाला देते हुए NTA को समाप्त करने की मांग की गई। साथ ही देश की परीक्षा प्रणाली में व्यापक और पारदर्शी सुधार की जरूरत बताई गई।
अपील में जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियरों के पिघलने, समुद्र के बढ़ते जलस्तर, पारिस्थितिकी तंत्र को हो रहे नुकसान और प्रजातियों के विलुप्त होने जैसे मुद्दों पर भी चिंता जताई गई।
समूह ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51ए (एच) का उल्लेख करते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानवतावादी सोच विकसित करना नागरिकों का मौलिक कर्तव्य बताया। साथ ही अंधविश्वास, जादू-टोना और लोगों को डायन बताकर प्रताड़ित करने जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए देशभर में सख्त कानून बनाने की मांग की गई।