India-Bangladesh: शेख हसीना के दौर को बताया अनकंफर्टेबल, अब भारत से रिश्ते रीसेट करना चाहता है बांग्लादेश

India- Bangladesh Relations: बांग्लादेश ने भारत के साथ रिश्तों को नए सिरे से तय करने की इच्छा जताई है। ढाका ने शेख हसीना के दौर के संबंधों को ‘असहज’ बताते हुए सीधे संवाद पर जोर दिया।
PM Modi and Bangladesh PM Tarique Rahman
पीएम मोदी और बांग्लादेश पीएम तारिक रहमानसोर्स-सोशल मीडिया
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Humayun Kabir Statement: बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के सत्ता से बेदखल होने के बाद मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार की कमान संभाली थी। उनके कार्यकाल के दौरान भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में काफी तल्खी देखने को मिली। इसके बाद हुए आम चुनाव में तारिक रहमान देश के नए प्रधानमंत्री बने, लेकिन भारत के प्रति उनका रुख भी अब तक ज्यादा सकारात्मक नहीं माना गया।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से बांग्लादेश की दूरी ने दोनों देशों के संबंधों में कड़वाहट को और बढ़ा दिया। हालांकि, अब ढाका की ओर से रिश्तों में सुधार के संकेत मिले हैं। तारिक रहमान की सरकार ने भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को नए सिरे से आगे बढ़ाने की इच्छा जताई है, जबकि शेख हसीना के कार्यकाल में बने रिश्तों को ‘अनकंफर्टेबल’ बताया है।

बांग्लादेश संबंधो को रीसेट करना चाहता है

बांग्लादेश के विदेश मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि उनका देश भारत के साथ संबंधों को ‘रीसेट’ करना चाहता है और इन्हें आपसी हितों पर आधारित नए रिश्ते के रूप में आगे बढ़ाना चाहता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि बहुपक्षीय मंचों के बजाय दोनों देशों के बीच सीधे द्विपक्षीय संवाद होना चाहिए। उनके मुताबिक, ढाका को भारत पर अत्यधिक निर्भरता वाली सोच से बाहर निकलकर संतुलित और व्यावहारिक विदेश नीति अपनानी होगी।

भारत से संतुलित रिश्तों की वकालत

बांग्लादेश के विदेश मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि भारत बांग्लादेश के लिए महत्वपूर्ण पड़ोसी है, लेकिन ढाका को अपनी विदेश नीति केवल भारत तक सीमित नहीं रखनी चाहिए।

उन्होंने कहा, नाश्ता भारत में, दोपहर का भोजन भारत में और रात का खाना भी भारत में, तो अपना खाना कब खाएंगे? उनका कहना था कि बांग्लादेश को स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति अपनाते हुए भारत के साथ मजबूत द्विपक्षीय संबंध बनाए रखने चाहिए।

दो सालों से तनावपूर्ण रहे हैं दोनों देशों के रिश्ते

कबीर की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब पिछले करीब दो वर्षों से भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव देखने को मिला है।

अगस्त 2024 में युवा आंदोलन के बाद सत्ता से बेदखल हुईं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत आ गई थीं। उन्हें भारत में शरण दिए जाने को लेकर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और बाद में बनी नई सरकार कई बार नाराजगी जता चुकी है

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भारत-बांग्लादेश रिश्तों में बदलाव की आहट, बांग्लादेश के मंत्री हुमायूं कबीर बोले- भारत संग नए अध्याय की जरूरत

BRICS सम्मेलन को लेकर भी बढ़ी दूरी

भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में हालिया तनाव BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर भी सामने आया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया। बांग्लादेश का कहना था कि उन्हें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए उचित तरीके से आमंत्रित नहीं किया गया था।

जबकि भारतीय पक्ष के मुताबिक रहमान को द्विपक्षीय यात्रा और बिम्सटेक अध्यक्ष के रूप में BRICS सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश ने दोनों निमंत्रणों को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया।

भारत के साथ 101 समझौतों की हो रही समीक्षा

बांग्लादेश की सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने भारत के साथ हुए 101 समझौतों और एमओयू की समीक्षा शुरू कर दी है। पार्टी के मुख्य सचेतक नुरुल इस्लाम मोनी ने कहा कि सभी समझौतों का मूल्यांकन किया जा रहा है और इसके निष्कर्ष जल्द सामने आएंगे।

जब उनसे पूछा गया कि क्या चटगांव और मोंगला बंदरगाहों का मित्र देशों के जहाजों के उपयोग से जुड़ा समझौता भी रद्द किया जाएगा, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल किसी एक समझौते पर अलग से फैसला नहीं हुआ है और सभी 101 समझौते समीक्षा के दायरे में हैं। वहीं, हुमायूं कबीर ने भी पुष्टि की कि यह पूरी प्रक्रिया संसदीय व्यवस्था के तहत की जा रही है।

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