Free Anemia Treatment In Maharashtra: गर्भावस्था के दौरान एनीमिया यानी खून की कमी मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। इसे देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने गर्भवती महिलाओं में तीव्र रक्तक्षय के समय पर निदान और इलाज पर विशेष जोर दिया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन और सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर के नेतृत्व में राज्य में आयरन सुक्रोज और फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज (FCM) इंजेक्शन के जरिए मुफ्त इलाज को गति दी जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, भारत में करीब 52 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में एनीमिया पाया गया है। गंभीर एनीमिया प्रसव के दौरान या उसके बाद मां के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है और मातृ एवं नवजात मृत्यु का एक महत्वपूर्ण कारण माना जाता है।
एचएमआईएस रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में जुलाई 2026 तक जांच के बाद 23,524 गर्भवती महिलाओं को तीव्र एनीमिया की उच्च जोखिम वाली श्रेणी में चिन्हित किया गया। इनमें से 21,337 महिलाओं को आयरन सुक्रोज या फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज इंजेक्शन से इलाज दिया जा चुका है। यानी इलाज का कवरेज 91 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
राज्य सरकार ने एनीमिया के नियंत्रण के लिए 'Four T Strategy'-Test, Talk, Treat और Track लागू की है। इसके तहत गर्भवती महिला की जांच, बीमारी की पहचान, इलाज और इलाज के बाद दोबारा जांच के साथ लगातार फॉलोअप किया जा रहा है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उससे ऊपर की सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में आयरन सुक्रोज के जरिए गंभीर एनीमिया का उपचार किया जा रहा है। वहीं, 2024-25 से सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आयरन सुक्रोज के साथ अधिक प्रभावी विकल्प के रूप में फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज भी उपलब्ध कराया गया है।
जनवरी 2026 में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को ऑनलाइन प्रशिक्षण भी दिया गया। साथ ही दवाओं का पर्याप्त स्टॉक, समय पर रेफरल और उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का इलाज पूरा होने तक फॉलोअप सुनिश्चित किया जा रहा है।
बताया गया कि अहिल्यानगर, लातूर, बीड, चंद्रपुर, वर्धा, रत्नागिरी, वाशिम और बुलढाणा में तीव्र एनीमिया से पीड़ित 100 प्रतिशत पात्र गर्भवती महिलाओं का इलाज किया गया है। नागपुर, सिंधुदुर्ग, गोंदिया, छत्रपति संभाजीनगर, पुणे, हिंगोली, जालना, धाराशिव और ठाणे में उपचार कवरेज 95 से 100 प्रतिशत के बीच रहा।
सरकार के अनुसार लातूर, नासिक, भिवंडी, कोल्हापुर, उल्हासनगर, नांदेड-वाघाला, नवी मुंबई, सोलापुर, चंद्रपुर, परभणी और सांगली-मिरज-कुपवाड़ महानगरपालिका क्षेत्रों में भी इलाज कवरेज 100 प्रतिशत रहा है।
कम कवरेज वाले नंदुरबार, सोलापुर, गड़चिरोली, पालघर, नासिक और भंडारा जिलों के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि गर्भावस्था की पुष्टि होते ही हिमोग्लोबिन जांच, आयरन-फोलिक एसिड के सेवन की सलाह, पौष्टिक आहार संबंधी मार्गदर्शन और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।
आयरन सुक्रोज और फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज से हिमोग्लोबिन और शरीर में आयरन का स्तर तेजी से बढ़ाने में मदद मिलती है। हालांकि, गर्भवती महिलाओं को ये इंजेक्शन केवल चिकित्सा अधिकारी की निगरानी में ही दिए जाने चाहिए।