

Development Works Face Basic Civic Issues: छत्रपति संभाजीनगर जिले के विकास का दावा करोड़ों रुपये की योजनाओं के आंकड़ों से किया जा रहा है, लेकिन महानगरपालिका की आम सभा में उठे सवालों ने विकास की जमीनी तस्वीर पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
शहर में हजारों करोड़ रुपये के पानी, सीवरेज, सड़क और रोशनी से जुड़े काम चल रहे हैं, इसके बावजूद नागरिकों को आज भी नियमित पानी, गटर व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट और कचरा जैसी प्राथमिक समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।
मंगलवार और गुरुवार को हुई सामान्य सभा में नगरसेवकों की शिकायतों की लंबी सूची ने साफ कर दिया कि शहर की कई बुनियादी समस्याएं एक-दो साल नहीं, बल्कि 15 से 20 वर्षों से महापालिका के एजेंडे में घूम रही हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शहर में विकास कार्यों पर लगातार करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो नागरिकों की रोजमर्रा की समस्याएं खत्म क्यों नहीं हो रही हैं।
योजनाओं पर खर्च, काम की गति और उसके वास्तविक परिणाम के बीच इतनी बड़ी दूरी क्यों बनी हुई है। सामान्य सभा की चर्चा ने इसी विरोधाभास को उजागर किया। शहर में इस समय सीवरेज व्यवस्था के लिए करीब 1,500 करोड़ रुपये के कार्य चल रहे हैं। इससे पहले भूमिगत सीवरेज योजना पर 465 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
चारों विधानसभा क्षेत्रों में लगभग 800 करोड़ रुपये के विकास कार्य जारी होने की जानकारी दी गई है। दूसरी ओर, शहर की बहुचर्चित 2,740 करोड़ रुपये की जलापूर्ति योजना अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। स्ट्रीट लाइट के लिए भी करोड़ों रुपये की BOT योजना लागू की गई क्षेत्रों में है।
इसके बावजूद सामान्य सभा में सबसे अधिक चर्चा इन्हीं व्यवस्थाओं की कमियों पर हुई। कहीं पानी की समस्या, कहीं गटर लाइन जाम, कहीं पुरानी सीवरेज व्यवस्था, कहीं स्ट्रीट लाइट बंद और कहीं कचरा उठाव नहीं होने की शिकायतें सामने आईं। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि योजनाओं के पूरा होने के बाद भी क्या नागरिकों की वास्तविक परेशानी समाप्त होगी।
मंगलवार को सुबह 11 बजे शुरू हुई सामान्य सभा रात साढ़े सात बजे तक चली। करीब साढ़े नौ घंटे तक चले कामकाज के बावजूद 12 विभागों से संबंधित नगरसेवकों के सभी प्रश्नों पर चर्चा नहीं हो सकी। इसके चलते सभा को स्थगित कर गुरुवार को फिर आयोजित करना पड़ा।
दो दिनों के कामकाज में भी चर्चा का बड़ा हिस्सा पानी, सीवरेज और स्ट्रीट लाईटों की समस्याओं के इर्द-गिर्द घूमता रहा। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि छत्रपति संभाजीनगर मनपा के सामने आज भी नागरिकों की प्राथमिक जरूरतों से जुड़े सवाल सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
पुराने शहर के कई इलाकों में अब तक पुरानी सीवरेज लाइनें नहीं बदली गई हैं। वर्षों पहले बिछाई गई इन लाइनों पर बढ़ती आबादी का अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। नतीजतन बार-बार सीवरेज जाम होने, गंदा पानी जमा होने और नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नगरसेवकों की ओर से लगातार शिकायतें किए जाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने का मुद्दा सभा में उठा। महापौर समीर राजूरकर ने कहा कि पुराने शहर में कई स्थानों पर सीवरेज व्यवस्था पुरानी होने के कारण समस्याएं बनी हुई हैं। ऐसे में नगरसेवकों द्वारा इन मुद्दों को सभा में उठाना स्वाभाविक है।
मनपा में लंबे समय तक शिवसेना और भाजपा की सत्ता रही है। वर्तमान में भाजपा के पास बहुमत है और शिवसेना भी सत्ता में सहभागी है। महापौर तथा स्थायी समिति सभापति जैसे महत्वपूर्ण पद भी सत्तारूढ़ पक्ष के पास हैं।
इसके बावजूद सत्ता पक्ष के नगरसेवक ही बड़ी संख्या में अपने-अपने क्षेत्रों की नागरिक समस्याएं सभा में उठा रहे हैं। इस स्थिति ने प्रशासन और सत्ताधारी पदाधिकारियों के बीच समन्वय को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए है।